ज्वाइनिंग के बाद फिल्ड में उतरे कलेक्टर:बैरागढ़ तहसील पहुंचे, रिकॉर्ड देखा

भोपाल, भोपाल के नए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ज्वाइनिंग के बाद पहली बार फिल्ड में उतरे। उन्होंने बैरागढ़ तहसील पहुंचकर रिकॉर्ड देखा। मीडिया से भी रुबरु हुए। उन्होंने कहा कि भोपाल में पहली पोस्टिंग है। पहले समझ लूं। फिर स्टेप बाय स्टेप काम करेंगे। बड़ा तालाब, अवैध कॉलोनी और प्राइवेट स्कूलों में ड्रेस-पुस्तकों की मोनोपॉली पर कार्रवाई करने की बात कहीं।

बता दें कि आईएएस मिश्रा भोपाल के 35वें कलेक्टर बने हैं। हाल ही में राज्य शासन ने उन्हें भोपाल का नया कलेक्टर बनाया है। इससे पहले वे धार कलेक्टर थे। इन्होंने 14 अप्रैल को ज्वाइन कर लिया था। वहीं, भोपाल कलेक्टर रहे कौशलेंद्र विक्रम सिंह मुख्यमंत्री सचिवालय में सचिव और टीएंडसीपी में पदस्थ किए गए हैं।

बैरागढ़, शहर वृत्त तहसील में निरीक्षण

कलेक्टर मिश्रा ने तहसील नजूल शहर वृत्त, भोपाल एवं संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) का निरीक्षण कर राजस्व कार्यों एवं व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान तहसीलदार हर्षविक्रम सिंह, आलोक पारे, प्रेमप्रकाश गोस्वामी और केके पड़ौले भी मौजूद रहे।

भोज वेटलैंड भोपाल की शान

इससे पहले कलेक्टोरेट में कलेक्टर मिश्रा मीडिया से रुबरु भी हुए। बड़ा तालाब किनारों पर अवैध कब्जे के संबंध में उन्होंने कहा कि भोज वेटलैंड राजधानी भोपाल की शान है। हमारी जो भी भूमिका है, उसे बेहतर करेंगे। अच्छा काम आगे बढ़ाएंगे और चुनौतियों को दूर करेंगे। बड़ा तालाब के आसपास कब्जे के संबंध में समझूंगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई करुंगा। अवैध कॉलोनियों पर लगातार कार्रवाई करने की बात कहीं। वहीं, जल्द ही स्कूल संचालकों की बैठक बुलाने का भी भरोसा दिया।

अधिकारी-कर्मचारियों की सराहना

मीडिया से चर्चा में कलेक्टर ने अधिकारी और कर्मचारियों की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी 24 घंटे तक काम करते हैं, तब अपनी जिम्मेदारी समझते ही हैं और जानकारी मीडिया में साझा करते भी हैं। जैसे कोरोना के समय सभी एक्टिव थे। एसआईआर में अच्छा काम किया। कलेक्टर ने यूरोप की वर्किंग स्टाइल को लेकर भी बात की। जिसमें शाम को कॉल उठाने के लिए बाध्य होने के संबंध में उल्लेख किया।

54 साल में भोपाल में 35 कलेक्टर

वर्ष 1972 में जब भोपाल जिला बना, तब अरुण कुमार गुप्ता पहले कलेक्टर के तौर पर यहां पदस्थ हुए थे। उनका कार्यकाल 2 अक्टूबर 1972 से 31 जनवरी 1973 तक था। यानी महज तीन महीने के लिए उन्हें यहां का कलेक्टर बनाया गया था। इन 54 साल में कोई महिला कलेक्टर यहां पर पदस्थ नहीं रही। 1972 से पहले भोपाल सीहोर जिले में आता था। मिश्रा 35वें कलेक्टर बने हैं।

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