नई दिल्ली: सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट का भगवान कहा जाता है। उन्होंने 1989 से 2013 तक लगातार 24 साल तक भारतीय क्रिकेट का भार अपने कंधों पर उठाया। इस दौरान उन्होंने 100 शतक लगाए। सचिन ने टेस्ट और वनडे में रनों का अंबार लगा दिया। टी20 क्रिकेट उनके करियर के आखिरी पड़ाव में आया था। इस वजह से वह इस फॉर्मेट में देश के लिए सिर्फ एक ही मैच खेले। सचिन के साथ कई युवा खिलाड़ी 80 के दशक में उभरे थे। इन सभी में सचिन के समान ही प्रतिभा थी, लेकिन कोई भी उनके आस पास नहीं पहुंच पाया। यहां हम ऐसे ही 5 खिलाड़ियों के बारे में बता रहे हैं।
विनोद कांबली
सचिन के स्कूल के साथी और रमाकांत आचरेकर के शिष्य विनोद कांबली को सचिन से भी ज्यादा प्रतिभाशाली माना जाता था। 1988 में दोनों ने स्कूल मैच में 664 रनों की ऐतिहासिक नाबाद साझेदारी की थी। इस साझेदारी में कांबली ने नाबाद 349 और सचिन ने नाबाद 326 रन बनाए थे। कांबली के अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत शानदार रही। टेस्ट में सिर्फ 17 मैचों में 1084 रन बनाए। उनका औसत 54.20 था, जो 1000 से ज्यादा रन बनाने वाले भारतीयों में सबसे ज्यादा था। छोटे करियर में ही उन्होंने 2 दोहरे शतक भी जड़ दिए थे। उनके नाम टेस्ट में कुल 4 शतक हैं। वहीं, वनडे में 104 मैचों में उन्होंने 2477 रन बनाए। हालांकि, शॉर्ट बॉल के खिलाफ कमजोरी, अनुशासनहीनता और मैदान के बाहर की खराब आदतों के कारण 24 साल की उम्र में ही कांबली का टेस्ट करियर खत्म हो गया।
अजय जडेजा
1990 के दशक में अजय जडेजा स्टाइलिश बल्लेबाज थे और इसी वजह से बेहद लोकप्रिय भी थे। वह गेंद के साथ भी अच्छा योगदान देने में सक्षम थे। वह वनडे में अच्छे स्ट्राइक रेट से रन बनाने और शानदार फील्डिंग के लिए जाने जाते थे। उन्होंने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण पारियां खेलीं। हालांकि, मैच फिक्सिंग के आरोपों के कारण उन पर 5 साल का बैन लग गया। बाद में कोर्ट ने बैन हटा दिया। हालांकि, इस वजह से उनका करियर चौपट हो गया। उन्होंने 15 टेस्ट मैच में 576 रन बनाए और 196 वनडे में 5359 रन बनाए। उनका औसत 37.47 का था। उन्होंने 6 शतक और 30 अर्धशतक लगाए।
प्रवीण आमरे
प्रवीण आमरे टेस्ट डेब्यू पर ही शतक जड़ने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं। 1992 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने यह कारनामा किया था। वह घरेलू क्रिकेट में मजबूत बल्लेबाज रहे, लेकिन भारतीय टीम में उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले। मौका मिलने पर वह उसे सही से भुना नहीं पाए। वह आज भी कोचिंग में सक्रिय हैं और क्रिकेट जगत में उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है, लेकिन वह खिलाड़ी के रूप में कुछ खास नहीं कर पाए। उन्होंने 11 टेस्ट मैच में 42.50 के औसत से 425 रन बनाए। इसमें 1 शतक और 3 अर्धशतक शामिल थे। वहीं, 37 वनडे में उनके बल्ले से 513 रन निकले।
संजय मांजरेकर
संजय मांजरेकर तकनीकी रूप से मजबूत बल्लेबाज थे। 1989-90 में पाकिस्तान दौरे पर शानदार प्रदर्शन के बाद उनसे काफी उम्मीदें थीं। हालांकि, वह उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। वह लंबे समय तक टीम का हिस्सा थे, लेकिन सचिन, द्रविड़ और गांगुली जैसे खिलाड़ियों के कारण उन्हें कम मौके मिले। बाद में कमेंट्री में उन्होंने अपनी खास पहचान बनाई। उन्होंने 37 टेस्ट मैच में 37.14 के औसत से 2043 रन बनाए। इसमें 4 शतक भी शामिल थे और 218 रन उनका बेस्ट स्कोर था। 74 वनडे में उनके बल्ले से 1994 रन निकले। इसमें एक शतक और 15 अर्धशतक शामिल थे।
मनोज प्रभाकर
मनोज प्रभाकर के करियर की शुरुआत बेहतरीन थी। उनके कपिल देव जैसे ऑलराउंडर बनने की उम्मीद थी। वह गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों में योगदान देने में सक्षम थे, लेकिन मैच फिक्सिंग के आरोपों ने उनकी करियर भी खत्म कर दिया। उन्होंने 39 टेस्ट में 32.65 के औसत से 1600 रन बनाए। इसमें एक शतक और 9 अर्धशतक शामिल थे। इसके अलावा उन्होंने 96 विकेट भी लिए। वहीं, 130 वनडे मैच में उन्होंने 1858 रन बनाए। वनडे में उन्होंने 2 शतक और 11 अर्धशतक लगाए। वहीं, गेंद के साथ 157 विकेट लिए।