टेक्निकल सपोर्ट यूनिट के तहत कोऑर्डिनेटर्स को दी जिम्मेदारी:शहरों में ‘सुपर विजन’ के लिए बनी टीम, फाइलें नहीं फंसा पाएंगे बाबू

रायपुर, छत्तीसगढ़ में नगरीय निकायों के विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और गुणवत्ता को लेकर उठते सवालों के बीच सरकार ने निगरानी और जवाबदेही का नया सिस्टम लागू किया है। संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास ने टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (टीएसयू) के तहत नियुक्त डिस्ट्रिक्ट इंफ्रास्ट्रक्चर कोऑर्डिनेटर्स की जिम्मेदारियां तय कर दी हैं।

नगरीय प्रशासन विभाग से जारी आदेश के मुताबिक अब शहरों में चल रहे बड़े निर्माण कार्यों और योजनाओं की शुरुआत से लेकर पूरा होने तक एक ही तकनीकी सिस्टम के तहत मॉनिटरिंग होगी। इसके लिए सभी नगर निगम आयुक्तों और नगर पालिका/नगर पंचायत के सीएमओ को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

नई व्यवस्था में कोऑर्डिनेटर्स प्रोजेक्ट के प्राक्कलन, बिल ऑफ क्वांटिटी और टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी सहयोग देंगे, साथ ही साइट पर जाकर निर्माण की गुणवत्ता और प्रगति की नियमित जांच करेंगे। विभाग, निकाय और निर्माण एजेंसियों के बीच समन्वय भी इन्हीं के जरिए होगा, ताकि काम तय समयसीमा में पूरा हो सके।

दरअसल, प्रदेश के कई शहरों में अधूरे प्रोजेक्ट, घटिया निर्माण और टेंडर प्रक्रिया में देरी जैसी समस्याएं लंबे समय से सामने आती रही हैं। नई व्यवस्था इन्हीं कमियों को दूर करने की कोशिश है। इसके तहत फाइल से लेकर फील्ड तक एक ही निगरानी तंत्र काम करेगा।

इन प्रमुख योजनाओं में करेंगे मदद टीएसयू कोऑर्डिनेटर्स को सरकार की प्रमुख योजनाओं की जिम्मेदारी दी गई है, जिनमें अधोसंरचना मद, 15वां वित्त आयोग मद, जल प्रदाय योजनाएं, मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना, गोधन योजना, नालंदा परिसर निर्माण और मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री की घोषणाएं शामिल हैं। इस व्यवस्था को सिर्फ कागजी न रहने देने के लिए विभाग ने सख्ती भी तय की है।

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