सिद्धू मूसेवाला को कांग्रेस की ही रैली में उड़ाने का था प्लान

चंडीगढ़
सिद्धू मूसेवाला हत्या के मुख्यारोपी कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने एक सनसनीखेज खुलासा किया है। गैंगस्टर लॉरेंस ने दिल्ली पुलिस को रिमांड के दौरान बताया कि सिद्धू मूसेवाला को पहले आरपीजी हमला कर उड़ाने की योजना थी लेकिन इस आरपीजी को उपलब्ध करवाने वाले लॉरेंस के पाकिस्तानी साथी और आतंकी हरविंदर सिंह रिंदा ने आखिरी मौके पर प्लान बदल दिया।

उसी आरपीजी का इस्तेमाल फिर मोहाली में पुलिस इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर पर हुए हमले में इस्तेमाल किया गया। गायक और कांग्रेस नेता रहे मूसेवाला पर यह हमला किसी रैली में किया जाना था।  गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने बताया कि सिद्धू मूसेवाला कांग्रेस में शामिल हो गया था और वह अक्सर कांग्रेस की रैलियों में भी जाता था। ऐसे में यह प्लान बनाया गया कि सिद्धू मूसेवाला पर आरपीजी हमला तब किया जाए, जब वह चुनावों में सार्वजनिक स्थल पर किसी रैली में हो। लेकिन इसमें सिद्धू के साथ वहां मौजूद अन्य लोगों की भी जान जाने का डर था। लॉरेंस इसकी पूरी तैयारी में था, लेकिन जब इस कदम के बाद कई और लोगों के मारे जाने की आशंका को देखते हुए इस फैसले को अंतिम समय में बदल दिया गया। फिर मोहाली में पंजाब पुलिस के इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर पर इस से हमला किया गया।
आईएसआई की मदद से पंजाब लाया गया था आरपीजी
आरपीजी को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से सरहद पार करवा कर पंजाब लाया गया था। इस  काम के लिए तस्करों की मदद ली गई थी। आतंकी रिंदा ने हमले को अंजाम देने के लिए लॉरेंस गैंग के सदस्यों को शामिल किया था। कनाडा में रह रहे भगोड़े आतंकवादी लखबीर सिंह लंडा ने भी रिंदा का सहयोग किया था।
पिछले साल हुआ था आरपीजी हमला
9 मई, 2022 को मोहाली में आरपीजी हमला आईएसआई और स्थानीय गैंगस्टरों के समर्थन से बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) द्वारा रची गई एक साजिश के रूप में सामने आया था। हमलावरों की पहचान हरियाणा के सुरखपुर गांव के दीपक और एक साथी के रूप में की गई, जिन्हें घटना के पांच महीने बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पकड़ लिया। पंजाब पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों और महाराष्ट्र में एटीएस के साथ एक संयुक्त अभियान में मुख्य आरोपी, लखबीर सिंह लंडा के प्रमुख गुर्गे और सहयोगी चरत सिंह को सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया। मूल रूप से पंजाब के तरनतारन जिले का रहने वाला लंडा पुलिस दबाव के कारण 2017 में कनाडा चला गया था।

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