इकतारा में शाम हुई ‘किशोराना’, गद्य पाठ के बीच बांसुरी की तान पर गूंजे सदाबहार तराने, मंत्रमुग्ध हुए श्रोता

 भोपाल। ख्यात पार्श्वगायक (स्वर्गीय) किशोर कुमार की आवाज का जादू आज भी ताजा और नया है। देश-दुनिया में किशोर-दा के करोड़ों प्रशंसक आज भी उन्हें शिद्दत से याद करते हैं। किशोर के तिलिस्म पर बुधवार शाम जब बीकानेर से आए कवि-कथाकार अनिरुद्ध उमट ने अपने सधे हुए गद्य को पढ़ना शुरू किया और युवा बांसुरी वादक नितेश मांगरोले ने गीतों की धुनों को तान दी तो इकतारा के सभागार में बैठे श्रोता इस मोहक जुगलबंदी में खो गए।

नवाचारी प्रयोग से जमाया रंग

पाठ का यह नवाचारी प्रयोग किशोर कुमार के गीतों और जादुई आवाज के असर को महसूस करने का उपक्रम साबित हुआ। मौका था कला और सिनेमा की शृंखला सिनेकारी की दूसरे कड़ी में मालवीय नगर स्थित इकतारा में आयोजित एक दिवसीय समारोह किशोराना का।

लेखक का अभिनंदन

किशोर कुमार पर उपन्यास लिख रहे लेखक अनिरुद्ध उमट की षष्ठी पूर्ति अभिनंदन प्रसंग के निमित्त सुदीप सोहनी फिल्म्स और तक्षशिला एजुकेशनल सोसाइटी के इस आयोजन में शहर के लेखक और कलाकार मौजूद रहे। उमट के नवाचारी गद्य में किशोर कुमार बीकानेर की गलियों से लेकर मुंबई तक उपस्थित रहे, जिसमें बीच में मोहम्मद रफी, गुलजार, अमित कुमार, राजेश खन्ना और लेखक के परिजन आदि पात्रों की तरह आते हैं।

किशोर के गीतों की धुन बजाई

गाद्य पाठ की रवानगी के बीच बांसुरी पर मेरे नैना सावन भादौं, मुसाफिर हूं यारो, कुछ तो लोग कहेंगे, वो शाम कुछ अजीब थी, ओ मांझी रे अपना किनारा की तान श्रोताओं को नए अनुभव लोक में ले जाती रही।
समारोह के पहले सत्र में वरिष्ठ रंगकर्मी राजीव वर्मा और पद्मश्री पं. उमाकांत गुंदेचा ने उमट का अभिनंदन किया। गुंदेचा ने कहा कि किशोर कुमार के सृजन पर उमट का यह लेखन एक विधा द्वारा दूसरी विधा के प्रति अनूठा सम्मान और रेखांकन है। समारोह का संचालन फिल्मकार सुदीप सोहनी ने किया।

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