सरकार के पक्ष में आए फैसले को मुकेश अंबानी की रिलायंस ने दी चुनौती, जानिए क्या है मामला

नई दिल्ली: रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और उसके विदेशी साझेदारों ने सरकार के साथ गैस विवाद के मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इन कंपनियों ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें मध्यस्थता फैसले को रद्द कर दिया गया था। यह फैसला केंद्र सरकार के 1.7 बिलियन डॉलर के उस दावे से जुड़ा है। सरकार ने आरोप लगाया गया था कि रिलायंस ने कृष्णा-गोदावरी बेसिन में उसके कुएं से गैस निकाली। हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिलायंस ने 14 मई को सबसे पहले याचिका दायर की। इसके बाद उसके साझेदारों यूके की BP पीएलसी की सहायक कंपनी बीपी एक्सप्लोरेशन (अल्फा) और कनाडाई कंपनी निको लिमिटेड ने भी अलग-अलग याचिकाएं दायर कीं।
हाई कोर्ट ने 14 फरवरी को रिलायंस और उसके साझेदारों के खिलाफ फैसला सुनाया था। कोर्ट ने सरकार के दावे को सही ठहराया था। कोर्ट का कहना था कि रिलायंस ने ओएनजीसी के ब्लॉक से गैस निकालकर ‘अनुचित लाभ’ कमाया है। ओएनजीसी का ब्लॉक रिलायंस के KG-D6 फील्ड के बगल में ही है। यह मामला 2013 का है। ओएनजीसी ने दावा किया था कि उसके IG और KG-DWN-98/2 ब्लॉक, रिलायंस के KG-D6 फील्ड के साथ एक कॉमन गैस पूल शेयर करते हैं। कंपनी ने हाई कोर्ट में कहा कि रिलायंस ने पहले ही KG-D6 को चालू कर दिया था और उस गैस को निकाल रही है जो उसके ब्लॉक से आई है। ओएनजीसी के ब्लॉक पर तब काम चल रहा था।





