नौकरी में एक जगह पर 2 साल भी नहीं टिक रहे Gen Z

नई दिल्ली: भारत में ग्लोबल कंपनियों के ऑफिसों (GCC-ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर) में एक अजीब स्थिति देखने को मिल रही है। TOI के मुताबिक, एक तरफ जहां नई भर्तियों में तेजी आई है, वहीं दूसरी तरफ Gen Z (आज के दौर के युवा) कर्मचारियों के जल्दी-जल्दी नौकरी छोड़ने से कंपनियां पुराने पदों को ही दोबारा भरने में जुटी हुई हैं।

  1. क्या है स्थिति?
    Quess Corp की रिपोर्ट के मुताबिक, Gen Z कर्मचारियों के एक कंपनी में टिकने का समय 24 महीने यानी 2 साल से भी कम हो गया है। स्थिति यह है कि कंपनियों में होने वाली कुल भर्तियों में से 40% हिस्सा सिर्फ रिप्लेसमेंट का है। इसका मतलब है कि हर 5 में से 2 भर्तियां नई नहीं हैं, बल्कि वे उन पदों को भरने के लिए की जा रही हैं जिन्हें कर्मचारी छोड़कर चले गए हैं।
  2. क्यों छोड़ रहे हैं नौकरी?
    खासकर टेक सेक्टर में युवा प्रोफेशनल्स बेहतर सैलरी, प्रमोशन की तेज रफ्तार और AI जैसी आधुनिक तकनीक पर काम करने के लालच में फटाफट नौकरियां बदल रहे हैं। इस वजह से कंपनियों के लिए भर्ती करना, ट्रेनिंग देना और फिर से नई भर्ती करने का एक कभी न खत्म होने वाला चक्र शुरू हो गया है।
  3. भर्तियों की स्थिति?
    रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की मार्च तिमाही में जीसीसी (GCC) में भर्तियों में शानदार सुधार दिखा है। पिछली तिमाही की तुलना में इस बार कर्मचारियों की संख्या में 12-14% की बढ़त हुई है, जबकि इससे पहले यह आंकड़ा सिर्फ 4-6% था।
  4. भविष्य की तस्वीर?
    भारत में इस समय लगभग 2,150 से 2,200 सक्रिय GCC (Global Capability Centres) काम कर रहे हैं। अनुमान है कि 2030 तक इनमें कर्मचारियों की संख्या 25 से 27 लाख तक पहुंच जाएगी। भर्तियों में यह तेजी एआई (AI), डेटा और प्लैटफॉर्म इंजीनियरिंग की वजह से आ रही है। कुल मांग का करीब 60% हिस्सा इन्हीं स्किल्स से जुड़ा है। Quess आईटी स्टाफिंग के सीईओ कपिल जोशी का कहना है कि यह तेजी सिर्फ थोड़े समय के लिए नहीं है, बल्कि यह बाजार में आ रहे बड़े सुधार की शुरुआत है।

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