भूल जाइए डायल 100, MP में पुलिस बुलाने के लिए आज से 112 डायल करें… सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया शुभारंभ

भोपाल। मध्य प्रदेश में पुलिस सहायता के लिए अब 100 की जगह 112 नंबर डायल करना होगा। नए डायल-112 वाहनों के शुभारंभ के साथ यह सुविधा प्रारंभ हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल में कुशाभाऊ ठाकरे सभागार से नए वाहनों को हरी झंडी दिखाकर जिलों के लिए रवाना किया। यहां से 112 वाहन रवाना होंगे। अभी तक डायल-100 में टाटा सफारी गाड़ियां चल रही थीं, पर अब अधिक सुविधाओं वाली स्कार्पियो एन शहरी क्षेत्र और बोलेरो ग्रामीण क्षेत्रों में दौड़ेंगी। इससे पुलिस जल्दी घटनास्थल पर पहुंच सकेगी।

नई कंपनी को पांच वर्ष के लिए संचालन की जिम्मेदारी

पहले चरण में 1200 वाहन शुरू हो चुके हैं, बाद में इनकी संख्या बढ़ाकर 2000 तक करने की तैयारी है। नए वाहन जिलों में पहुंचने के बाद दौड़ने लगेंगे। पहली खेप में 250 वाहन भोपाल से रवाना किए जा चुके हैं। पिछले छह वर्ष से नए वाहनों की प्रतीक्षा हो रही थी, पर कभी टेंडर प्रक्रिया में देरी तो कभी कोर्ट केस के कारण नए वाहन नहीं चल पा रहे थे। नई कंपनी को पांच वर्ष के लिए संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें लगभग 1400 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

अलग-अलग मोबाइल एप की सुविधा

नए वाहनों में डेटा एनालिटिक्स, रीयल-टाइम लोकेशन ट्रैकिंग, आमजन और पुलिस के लिए अलग-अलग मोबाइल एप की सुविधा रहेगी। इसके अतिरिक्त एकीकृत सेवा 112 से अन्य सेवाओं को भी जोड़ा गया है। पुलिस (100), एंबुलेंस (108), अग्निशमन (101), महिला हेल्पलाइन (1090), साइबर क्राइम (1930), रेल मदद (139), हाइवे एक्सीडेंट रिस्पांस (1099), प्राकृतिक आपदा (1079) और महिला एवं चाइल्ड हेल्पलाइन (181,1098) जैसी सभी सेवाएं एक ही नंबर 112 से उपलब्ध होंगी।

डायल 112 में ये सुविधाएं

– प्रत्येक शिफ्ट में 100 एजेंट की क्षमता वाला नया कांटैक्ट सेंटर, जिसमें 40 सीटों की डिस्पैच यूनिट है।

– पीआरआइ लाइनों से एसआइपी आधारित ट्रंक लाइन पर माइग्रेशन होगा, जिससे 112 पर कॉल प्राप्त करना अधिक सहज हो गया।

– उन्नत बिजनेस इंटेलिजेंस और एमआइएस रिपोर्टिंग टूल्स।

– नंबर मास्किंग की सुविधा, जिससे फोन करने वाले का नंबर पुलिस को पता नहीं चलेगा।

– चैटबाट से लोगों से संवाद और शिकायतों की ट्रैकिंग की सुविधा। – पारदर्शिता के लिए वाहन में डैशबोर्ड कैमरा और बाडी वार्न कैमरा की व्यवस्था।

एक नवंबर 2015 से शुरू हुई डायल-100 की उपलब्धियां

भारत की पहली केंद्रीकृत, राज्यव्यापी पुलिस आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवा थी, जिसमें एक हजार चार पहिया और 150 दोपहिया वाहन शामिल थे। डायल-100 सेवा में जून-2025 तक कुल आठ करोड़ 99 लाख कॉल आईं, जिनमें से दो करोड़ सात लाख 91 हजार कॉल कार्रवाई के लायक थीं। एक करोड़ 97 लाख 2 हजार कॉल में जनता को लाभ पहुंचाया गया। 2,23,288 वरिष्ठ नागरिक, 19,71,396 महिला सुरक्षा मामले में मदद पहुंचाई गई।

1,300 परित्यक्त नवजात शिशुओं उचित जगह पर पहुंचाया गया। सड़क दुर्घटनाओं में 12,48,621 को और 27,112 लापता बच्चों को खोजने में सहायता मिली। खुदकुशी के प्रयास और अवसाद से जुड़े 2,64,347 मामलों में पुलिस ने पहुंचकर घटनाओं को रोका।

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