सरकारी धन गबन मामलों में वित्त विभाग ने जताई नाराजगी:कोष और लेखा व महालेखाकार कार्यालय के अधिकारियों को नहीं बनाया जाएगा गवाह

सरकारी धन के गबन और करप्शन से जुड़े मामलों में कोर्ट और विभागीय जांच के दौरान रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारियों को गवाही और बयान के लिए बुलाने पर वित्त विभाग ने कड़ा एतराज जताया है। विभाग ने साफ निर्देश जारी किए हैं कि स्टेट फाइनेंसियल सेल (SFIC) और महालेखाकार कार्यालय (AG) के अधिकारी-कर्मचारियों को किसी भी स्थिति में गवाह या अभियोजन साक्षी नहीं बनाया जाएगा।

वित्त विभाग के अपर सचिव रोहित सिंह ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, संचालक लोक अभियोजन, विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त, कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ को पत्र भेजकर नए निर्देश दिए हैं।

पेमेंट डेटा और आंतरिक ऑडिट करता है SFIC

स्टेट फाइनेंसियल सेल, आयुक्त कोष और लेखा कार्यालय के अधीन काम करता है। यह इंटीग्रेटेड फाइनेंसियल मैनेजमेंट इंफार्मेशन सिस्टम (IFMIS) के जरिए बजट नियंत्रण अधिकारियों द्वारा किए गए भुगतान का डेटा एनालिसिस करता है। साथ ही, अलग-अलग कार्यालयों का आंतरिक लेखा परीक्षण (इंटरनल अकाउंट ऑडिट) भी करता है। गबन की स्थिति सामने आने पर संबंधित विभाग को ही एफआईआर और विभागीय जांच कराना होता है।

महालेखाकार को गवाह बनाने पर रोक

वित्त विभाग ने कहा है कि महालेखाकार की आडिट रिपोर्ट नियमों के अनुसार ही होती है। यदि कोई आपत्ति गलत लगती है तो उस पर सीधे महालेखाकार कार्यालय को पत्र भेजा जा सकता है। वहीं सही आपत्ति मिलने पर संबंधित विभाग को कार्रवाई करनी होगी। विभाग ने साफ कर दिया है कि एजी कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी को न्यायालय में पेश होने की आवश्यकता नहीं है।

विभागीय स्तर पर होगी कार्रवाई

वित्त विभाग ने एमपी वित्तीय संहिता के नियम 22, 23 और 25 का हवाला देते हुए कहा है कि गबन और भ्रष्टाचार मामलों में विभागीय और कानूनी कार्यवाही, जिम्मेदारी तय करना और शासन को हुई हानि की वसूली की जिम्मेदारी संबंधित विभागाध्यक्ष की होगी।

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