शहबाज और मुनीर से बंद दरवाजों के पीछे क्यों मिले ट्रंप, भारत से तनाव के बीच क्या हैं इसके मायने? फंसेगा पाकिस्तान

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को ओवल ऑफिस में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की। इस बैठक में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर भी शामिल हुए, जिन्होंने इसी साल गर्मियों की शुरुआत में वॉइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात की थी। ट्रंप के साथ इस मुलाकात में विदेश मंत्री मार्को रुबियो मौजूद रहे। यह मुलाकात वॉशिंगटन और दुनिया के एकमात्र परमाणु शक्ति संपन्न मुस्लिम राष्ट्र के बीच हाल ही में फिर से मजबूत हुए संबंधों का संकेत है। मुलाकात के ठीक पहले ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में दोनों मेहमानों को महान नेता कहकर संबोधित किया था।

बंद दरवाजे के भीतर मुलाकात

ओवल ऑफिस की यह मुलाकात बंद दरवाजों के भीतर हुई थी और इसमें प्रेस को जाने की मनाही थी। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाम 5 बजे से कुछ पहले वॉइट हाउस में पहुंचे थे और पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल 6:18 बजे बाहर गया। यह बैठक अमेरिका और पाकिस्तान के बीच जुलाई में हुए व्यापार सौदे के बाद हुई है, जो दोनों देशों के बीच गहराते संबंधों का उदाहरण है। यह मुलाकात इसी सप्ताह मंगलवार को न्यूयॉर्क में ट्रंप की अरब और मुस्लिम देशों के साथ बैठक के बाद हुई, जिसमें पाकिस्तान भी शामिल था।

शहबाज शरीफ और मुनीर जब वॉइट हाउस पहुंचे तो ट्रंप कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर कर रहे थे और पत्रकारों से बात कर रहे थे। समाचार एजेंसी ANI ने बताया कि दोनों पाकिस्तानी नेताओं को ट्रंप से मिलने के लिए करीब एक घंटे तक इंतजार करना पड़ा। कई एक्सपर्ट ने भी इंतजार करने की बात कही है। हालांकि, स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है
पाकिस्तानी सरकार के शीर्ष सूत्रों ने इस बातचीत को बेहद महत्वपूर्ण और सुरक्षा केंद्रित बताया। सूत्रों के अनुसार, यह बैठक पाकिस्तान-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी और आर्थिक सहयोग के नए युग की शुरुआत है। ओवल ऑफिस की चर्चा सुरक्षा से आगे बढ़कर आर्थिक जुड़ाव, आतंकवाद का मुकाबला और निवेश के अवसरों पर भी केंद्रित रही।

पाकिस्तान का अमेरिकी की तरफ झुकाव

पाकिस्तान की शरीफ सरकार ट्रंप प्रशासन के साथ संबंध बनाने के लिए पूरा जोर लगा रही है। अमेरिका पारंपरिक रूप से पाकिस्तान को दक्षिण एशिया में रणनीतिक सुरक्षा साझेदार के रूप में देखता रहा है। लेकिन पाकिस्तान में अलकायदा सरकार ओसामा बिन लादेन के पाए जाने के बाद इस रिश्ते दरार पड़ी। ट्रंप ने 2018 में खुद कहा था कि इस्लामाबाद ने वॉशिंगटन को झूठ और धोखे के अलावा कुछ नहीं दिया है।

लेकिन ऐसा लगता है कि अब पाकिस्तान को अमेरिका के पास देने के लिए कुछ नया है। इसकी झलक इसी महीने की शुरुआत में शरीफ के आवास पर एक हाई-प्रोफाइल हस्ताक्षर समारोह में देखने को मिली। 8 सितम्बर को दोनों देशों के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जो पाकिस्तान से अमेरिका को महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्वों की आपूर्ति से संबधित था। इसके अलावा ट्रंप ने पाकिस्तान पर टैरिफ को भी कम करते हुए 19% पर रखा है,जबकि भारतीय आयात पर यह 50 प्रतिशत है।

भारत के लिए क्यों है महत्पूर्ण?

ट्रंप की असीम मुनीर और शहबाज शरीफ से मुलाकात का समय भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिका ने भारत के ऊपर 50% का भारी टैरिफ लगाया है। इसके साथ ही ट्रंप प्रशासन रूसी तेल खरीदने से रोकने के लिए भारत पर दबाव बना रहा है। वॉशिंगटन का कहना है कि रूसी ऊर्जा खरीद से भारत यूक्रेन में मॉस्को के युद्ध की फंडिंग कर रहा है। वॉशिंगटन से मजबूत रिश्ते पाकिस्तान को अनुदान में मदद दिला सकते हैं, जो कंगाल देश की अर्थव्यवस्था को सहारा देगा।

दोराहे पर खड़ा पाकिस्तान

इस मुलाकात के साथ पाकिस्तान के सामने एक बड़ी मुश्किल सामने आने वाली है। उसे ट्रंप को खुश करने के लिए अमेरिकी योजना पर काम करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। एक्सपर्ट का कहना है कि ट्रंप और शहबाज शरीफ की मुलाकात के साथ पाकिस्तान के पास मौका है कि वह अमेरिका को बगराम एयरबेस वापस पाने में मदद करे। गाजा पर अरबों और इजरायल के साथ मिलकर काम करे। सऊदी शांति योजना और अब्राहम समझौते को पुनर्जीवित करे। ईरान को परमाणु निरस्त्रीकरण में मदद करे। लेकिन यह साफ है कि अगर पाकिस्तान का सैन्य या राजनीतिक नेतृत्व इस पर हामी भरता है तो उसके लिए यह बहुत खतरनाक होगा और अपने ही देश में भारी विरोध का सामना करना पड़ेगा।

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