महिला पंथी को स्थापित करने में स्व. अमृता का योगदान अतुलनीय:कोर्सेवाड़ा

भिलाई,  पुरखा के सुरता जन कल्याण समिति की ओर से 70 के दशक की ख्याति प्राप्त महिला पंथी कलाकार एवं छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मिनीमाता सम्मान प्राप्त अमृता बारले की द्वितीय पुण्यतिथि  पर राज्य स्तरीय सांस्कृतिक एवं सम्मान समारोह ग्राम मोरिद भिलाई तीन में आयोजित किया गया। इस दौरान अतिथियों ने पंथी के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को मुखरता प्रदान करने वाली स्व. अमृता बारले के योगदान का स्मरण किया और उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी। मुख्य अतिथि अहिवारा विधायक राजमहंत डोमन लाल कोर्सेवाडा और विशिष्ट अतिथि दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर सहित तमाम अतिथियों ने शुरुआत में गुरु बाबा घासीदास की आराधना के बाद स्व. अमृता बारले के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी। अतिथियों का स्वागत करते हुए संयोजक पद्मश्री डॉ. राधेश्याम बारले ने अपने स्वागत भाषण में बताया कि उनकी बहन स्व. अमृता बारले ने विपरीत परिस्थितियों में महिला पंथी की शुरुआत की और जीवन भर पंथी के प्रति समर्पित रही।

अहिवारा विधायक राजमहंत डोमलाल कोर्सेवाड़ा ने स्व. अमृता बारले के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि सतनामी समाज का प्रतिनिधित्व करते हुए महिला पंथी को स्थापित करने में उनका योगदान हमेशा रेखांकित होता रहेगा। दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर ने कहा कि स्व. अमृता बारले छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की मिसाल थीं और महिला पंथी कलाकार के तौर पर हमेशा याद की जाती रहेंगी। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरूआत प्रदेश के ख्याति प्राप्त हरिकीर्तन कर पंडित कामता प्रसाद शरण  कुडेरादादर, छुरा गरियाबंद के हरिकीर्तन से हुई।

इसके उपरांत महिला पंथी दल माता सफुरा महिला पंथी दल नेवई  का पंथी नृत्य,  लक्ष्मीकांत जडेजा भटगांव जिला मुंगेली,  मांदरी नृत्य गढ़िया बाबा आदिवासी मांदरी नृत्य सरईटोला नगरी , भरथरी हिमानी वासनिक राजनादगांव , महिला पंथी सत्संग महिला पंथी नृत्य दल खुर्सीपार भिलाई, भरथरी कल्याणी बारले आशीष नगर रिसाली सुवा नृत्य  सुवा सखी सहेली नेवई , गेड़ी नृत्य,आदिवासी गेड़ीनृत्य गुन्ड़पारा सिहावा, पारम्परिक पुरुष पंथी अश्वन डहरिया,सहदेव बंजारे, बिरेंद्र टन्डन,जोगांश चेलक, सतानंद बंजारे व शैलेन्द्र धृतलहरे  द्वारा पंथी नृत्य प्रस्तुत किया गया। वहीं अंतरराष्ट्रीय मांदर वादक गौकरण दास बघेल के नेतृत्व में 50 मादर वादकों का एक साथ जुगलबन्दी की अनूठी प्रस्तुति दी। वहीं ख्याति प्राप्त लोक गायक तुषान्त बारले ने अपने समूह के साथ रंगारंग प्रस्तुति दी।

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