वन-राजस्व सीमा विवाद खत्म करने की तैयारी:30 लाख हेक्टेयर जमीन चिह्नित, 6500 वनखंडों में तय होंगी जंगल की सीमाएं

प्रदेश में वन व्यवस्थापन के लिए मप्र वन विभाग ने प्रदेशभर में वन विभाग की 30 लाख हेक्टेयर जमीन चिह्नित कर ली है। यह जमीन प्रदेशभर के 6500 वनखंडों में मौजूद है। जहां वन क्षेत्र और राजस्व क्षेत्र के बीच सीमा रेखा ही स्पष्ट नहीं हैं, इस कारण एक ही भूमि वन और राजस्व दोनों रिकॉर्ड में दर्ज है। कई जगह वन विभाग की खाली जमीन पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण भी हैं, लेकिन सीमा स्पष्ट नहीं होने से आम लोगों में भी भ्रम की स्थिति है।

इस तरह के सभी विवादों के स्थाई समाधान वन व्यवस्थापन के जरिए ही हो सकता है। सरकार के स्तर से हरी झंडी मिलने के बाद वन विभाग ने वन व्यवस्थापन का पूरा खाका तैयार लिया है। वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2026 में यह प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसके लिए अगले माह कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद वन व्यवस्थापन अधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होगी।

डिप्टी कलेक्टरों की नियुक्ति प्रस्ताव में वन व्यवस्थापन के लिए प्रदेश के सभी वन मंडलों में डिप्टी कलेक्टर स्तर के अनुभवी राजस्व अधिकारी नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। राज्य सरकार डिप्टी कलेक्टरों को एक-एक साल के लिए डेपुटेशन पर वन विभाग में भेज सकती है या रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर या कलेक्टर स्तर के अफसरों को एक साल के लिए संविदा नियुक्ति देकर यह काम करा सकती है। सभी 65 फॉरेस्ट डिवीजनों में यह पोस्टिंग होगी।

रिकॉर्ड में गड़बड़ी, कब्जे सबसे ज्यादा पांच जिलों गुना, शिवपुरी, छतरपुर, पन्ना और छिंदवाड़ा में यह समस्या ज्यादा हैं। यहां राजस्व और वन विभाग के बीच जमीनों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी, अवैध कब्जे के सर्वाधिक मामले हैं। पायलट फेज में इन्हीं 5 जिलों से वन व्यवस्थापन की शुरुआत की जा सकती है। राज्य सरकार अपने हिसाब से किसी अन्य जिलों को भी वन व्यवस्थापन के लिए चुन सकती है। वन व्यवस्थापन के लिए उन जमीनों को चिह्नित किया गया है, जिनका भारतीय वन अधिनियम के तहत धारा-4 में नोटिफिकेशन वर्ष 1960 और 1972 में हुआ था।

केंद्र से मांगी है मंजूरी

37 वन मंडलों में पेड़ों की कटाई कराएगा वन विभाग

मप्र वन विभाग अगले एक साल में कार्य आयोजना (वर्किंग प्लान) के तहत 37 वन मंडलों और एक टाइगर रिजर्व के 1 लाख 9 हजार हेक्टेयर में पेड़ों की कटाई कराएगा। राज्य सरकार ने इसके लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अनुमति मांगी है। जिन क्षेत्रों में वन कटाई कराई जानी है, उनका पूरा ब्यौरा केंद्र सरकार को भेजा गया है।

वर्किंग प्लान के तहत जंगल में होने वाली इस कटाई के बाद लाखों टन लकड़ी निकलेगी। जिसे वन विभाग अपने डिपो के जरिए नीलाम करेगा। गौरतलब है कि हर 10 साल के बाद वन क्षेत्रों का वर्किंग प्लान तैयार किया जाता है। इसमें पुराने और अनुपयोगी जंगल की कटाई और वैज्ञानिक ढंग से नए जंगल लगाने की योजना बनती है। इसके लिए जंगल का सर्वे कर काटने योग्य पेड़ों की मार्किंग की जाती है।

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