बांग्लादेश में शरीफ उस्मान हादी की हत्या कर कौन लगा रहा भारत के खिलाफ आग? यूनुस या ISI, किसके इशारे पर फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन?

ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद बगैर किसी जांच पड़ताल के जिस तरह से भारत का नाम घसीटा जा रहा है, उसने इस सनसनीखेज अपराध को एक राजनीतिक और कूटनीतिक विवाद में बदल दिया है। हादी की मौत के तत्काल बाद बांग्लादेश के कई शहरों में हिसा भड़क उठी और ढाका समेत कई शहरों में मीडिया दफ्तरों को आग के हवाले कर दिया गया। भारत के डिप्टी हाई कमिश्नर के आवासीय परिसर में पत्थरबाजी की गई और प्रदर्शनकारियों को किसी तरह से वहां से हटाया गया। बांग्लादेश में खुलेआम भारत विरोधी नारे लगाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भारत विरोधी और भड़काऊ पोस्ट किए जा रहे हैं। भारत के खिलाफ बांग्लादेश में नफरत को हवा दी जा रही है।

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि छात्र नेता हादी के हमलावर भारत भाग गए हैं। लेकिन अभी तक ना तो मोहम्मद यूनुस की सरकार ने और ना ही आरोप लगाने वाले दूसरे छात्र नेताओं ने अपने दावे को साबित करने के लिए कोई सबूत पेश किया है। इसके बावजूद, हत्या को "भारत-प्रायोजित" बताने की कोशिशें चल रही हैं, जिससे चुनाव से पहले बांग्लादेश का माहौल और जहरीला हो गया है। भारत के खिलाफ रैलियों का आयोजन हो रहा है, जिसमें भड़काऊ बयानबाजी हो रही है और ऐसा लग रहा है कि अदृश्य शक्तियां चाहती हैं कि बांग्लादेश, पूरी तरह से भारत के खिलाफ हो जाए।

बांग्लादेश में भारत विरोधी आग कौन लगा रहा है?
ढाका और दूसरे शहरों में प्रदर्शनकारियों ने भारत पर हादी के हमलावरों को पनाह देने का आरोप लगाते हुए नारे लगाए और उन्हें तुरंत वापस भेजने की मांग की। शुरूआत से ही भारत के खिलाफ जहरीली बयानूाजी करने वाली नेशनल सिटिजन पार्टी जैसे राजनीतिक संगठनों ने दावा किया कि हमलावर गोलीबारी करने के बाद भारत भाग गए हैं। उन्होंने अंतरिम सरकार से कड़े कदम उठाने की अपील की, जिसमें संदिग्धों के वापस आने तक ढाका में भारतीय हाई कमीशन को बंद करना भी शामिल है।
NCP के एक अहम नेता सरजिस आलम ने कहा, "जब तक भारत, हादी भाई के हत्यारों को वापस नहीं भेजता, तब तक अंतरिम सरकार के तहत बांग्लादेश में भारतीय हाई कमीशन बंद रहेगा। अभी नहीं तो कभी नहीं। हम युद्ध में हैं!" इसी हफ्ते की शुरुआत में जुलाई ओइक्या” (जुलाई एकता) बैनर तले सैकड़ों प्रदर्शनकारी भारतीय हाई कमीशन की ओर मार्च करते हुए भारत विरोधी नारे लगा रहे थे और शेख हसीना को भारत से वापस लाने की मांग कर रहे थे।14 दिसंबर को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारतीय हाई कमिश्नर प्रणय वर्मा को बुलाकर भारत से हसीना द्वारा दिए गए “भड़काऊ बयानों” पर अपनी “गंभीर चिंता” जताई। प्रणय वर्मा के खिलाफ भी छात्र नेता नफरती बयानबाजी कर रहे हैं। इसके अलावा भारत में मामले से परिचित लोगों का कहना है कि बांग्लादेश का एक अखबार भी भारत के खिलाफ नफरत भड़काने का काम कर रहा है और सिर्फ उसी अखबार के खिलाफ कोई प्रदर्शन नहीं हो रहा है। जिन मीडिया दफ्तरों पर हमले हुए हैं, उनपर भारत का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है।

भारत ने तमाम आरोपों को सिरे से किया खारिज
दूसरी तरफ भारत ने बांग्लादेश के नेताओं की तरफ से लगाए गये आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत ने कहा है कि वो कट्टरपंथी तत्वों की तरफ से भारत के खिलाफ बनाए जा रहे फर्जी नैरेटिव को सिरे से खारिज कर रहा है। भारत ने कहा है कि ये दुर्भाग्य की बात है कि अंतरिम सरकार ने ना तो कोई जांच की है और ना ही कोई सबूत भारत के साथ साझा किया है, जिसमें इस घटना से संबंधित कोई जानकारी हो। जाहिर तौर पर कोई तो है, जो बांग्लादेश में हिंसा भड़काकर अपनी सियासी रोटी सेंकना चाह रहा है।

क्या वो मोहम्मद यूनुस हैं? ये सवाल इसलिए क्योंकि फरवरी में चुनाव अगर होते हैं तो फिर नई सरकार के गठन के बाद उनके हाथ से सत्ता चली जाएगी। तो क्या सत्ता में बने रहने के लिए वो बांग्लादेश को अशांत रखना चाहते हैं और भारत के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं? क्या हादी हत्याकांड की स्क्रिप्ट पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI ने लिखी है, ताकि भारत के खिलाफ नफरत की आग को भड़काया जाए और ऐसा ही दिख भी रहा है।

भारत विरोधी बयानबाजी पर दिल्ली सख्त
भारतीय सूत्रों का कहना है कि बिना जांच पूरी हुए सार्वजनिक मंचों से भारत पर आरोप लगाना न सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि बांग्लादेश के भीतर हिंसा को भी बढ़ावा देता है। इसी कड़ी में भारत ने इसी हफ्ते बांग्लादेशी दूत को तलब कर भारत विरोधी बयानबाजी पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। नवभारत टाइम्स से बात करते हुए जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स ने इशारा किया है कि हादी की हत्या को लेकर भारत-विरोधी नैरेटिव गढ़ने से बांग्लादेश के अंतरिम शासक मुहम्मद यूनुस को अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

उनका कहना है कि यूनुस सरकार पहले से ही एक कठिन स्थिति से गुजर रही है। चुनाव पर सवाल हैं, शेख हसीना को फांसी देने से अवामी लीग सड़कों पर है, देश की आर्थिकि स्थिति दिनों दिन खराब हो रही है। ऐसे में ‘बाहरी दुश्मन’ का डर दिखाकर जनता का ध्यान भटकाना एक कोशिश हो सकती है। हादी खुद एक कट्टर भारत-विरोधी और पाकिस्तान-समर्थक था और उसकी हत्या को काफी आसानी से भारत से जोड़ा जा सकता है। ISI ऐसे काम करने में माहिर है। इसीलिए एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर हादी की हत्या की निष्पक्ष, पारदर्शी और तत्काल जांच नहीं हुई, तो यह मामला चुनावी राजनीति का हथियार बनता रहेगा।

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