पाकिस्तान को दरकिनार कर सऊदी प्रिंस से मिले एर्दोगन, बनाएंगे सैन्य रिश्ता, ‘इस्लामिक नाटो’ का पटाखा फुस्स

रियाद: तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने रियाद में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) से मुलाकात की है। एर्दोगन के मंगलवार को रियाद पहुंचने और एमबीएस से बैठक ने दुनिया और खासतौर से पाकिस्तान का ध्यान ध्यान खींचा है। दुनिया इसलिए इस मुलाकात हो देख रही है क्योंकि दो पूर्व-प्रतिद्वंद्वी देश ना सिर्फ संबंध सुधार रहे हैं बल्कि रक्षा समझौते भी कर रहे हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान के लिए यह दौरा एक झटके की तरह है। पाकिस्तान की कोशिश तुर्की को अपने और सऊदी के रक्षा समझौते में शामिल करते हुए ‘इस्लामिक नाटो’ बनाने की थी लेकिन एर्दोगन ने इस्लामाबाद को दरकिनार कर सीधे एमबीएस से बात की है।
मिडिल ईस्ट आई के मुताबिक, तुर्की और सऊदी अरब ने जो जॉइंट डिक्लेरेशन जारी किया, उसमें उन्होंने डिफेंस संबंधों पर जोर दिया गया है। साझा बयान में कहा गया है कि दोनों पक्ष मौजूदा डिफेंस सहयोग समझौतों को एक्टिव करने पर सहमत हुए हैं। साथ ही क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए मल्टीलेटरल प्लेटफॉर्म के जरिए संबंध मजबूत करने पर प्रतिबद्धता जताई है। इसके अलावा आतंकवाद से लड़ाई में सहयोग और साइबर सुरक्षा क्राइम पर मिलकर काम करने की बात कही गई है।
तुर्की के सामने संबंध साधने की चुनौती
यूके के बर्मिंघम विश्वविद्यालय के विषेशज्ञ उमर करीम का कहना है कि तुर्की को रियाद के साथ किसी भी सुलह को अन्य क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों के साथ संबंधों के साथ संतुलित करते हुए चलना है। इस यात्रा में यह साफ हो जाएगा कि यूएई के साथ प्रतिद्वंद्विता और इजरायल से सुरक्षा खतरे में सऊदी अरब को तुर्की से क्या भरोसा मिलेगा।
अक्टूबर 2018 में इस्तांबुल में सऊदी वाणिज्य दूतावास के अंदर सऊदी एजेंटों के जमाल खशोगी की हत्या के बाद रियाद और तुर्की के बीच संबंध बहुत ज्यादा तनावपूर्ण हो गए थे। दोनों देशों के रिश्ते में उस समय काफी तनातनी देखी गई थी लेकिन बीते दो साल में रिश्ते फिर से पटरी पर आ रहे हैं।





