आज के समय में पुरुष भी अपनी पर्सनालिटी को लेकर उतने ही सजग हो गए हैं, जितनी कि महिलाएं. यही वजह है कि मेट्रो सिटीज से लेकर छोटे शहरों तक में मेल ग्रूमिंग (Male Grooming) का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. हैरानी की बात यह है कि आज कई जगहों पर पुरुष स्किन केयर और बोटॉक्स जैसे ट्रीटमेंट्स पर महिलाओं से भी ज्यादा ध्यान देने लगे हैं.

क्या है यह बोटॉक्स का ट्रेंड और क्यों हो रहा है पॉपुलर?

आज के इस दौर में हर कोई यंग और फ्रेश दिखना चाहता है. चाहे कॉर्पोरेट ऑफिस की मीटिंग हो या सोशल मीडिया की दुनिया, अच्छा दिखना आज के समय में कॉन्फिडेंस से जुड़ गया है. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, चेहरे पर झुर्रियां (Wrinkles) और फाइन लाइन्स आने लगती हैं. माथे की लकीरें, दो भौंहों के बीच बनने वाली गहरी लाइनें या आंखों के आसपास की झुर्रियां अब पुरुषों को भी परेशान करने लगी हैं. इसी समस्या से निपटने के लिए बोटॉक्स पुरुषों के बीच एक बेहतरीन ऑप्शन बनकर उभर रहा है. यह एक ऐसा नॉन-सर्जिकल ट्रीटमेंट है, जिसमें किसी तरह की सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती और कुछ ही समय में चेहरे का लुक काफी फ्रेश लगने लगता है.


कैसे काम करता है बोटॉक्स और क्या यह सबके लिए है?

नोएडा के कैलाश हॉस्पिटल के कंसलटेंट प्लास्टिक सर्जन डॉ. आदित्य नारायण चौधरी के मुताबिक, पुरुषों में बोटॉक्स और अन्य नॉन-सर्जिकल एस्थेटिक ट्रीटमेंट के प्रति बढ़ती रुचि पर्सनल ग्रूमिंग और त्वचा की देखभाल को लेकर बदलती सोच को दर्शाती है. अब पुरुष भी माथे की लकीरों, भौंहों के बीच की रेखाओं और आंखों के आसपास दिखने वाली झुर्रियों जैसी समस्याओं को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं और इनके लिए उपलब्ध उपचार विकल्पों के बारे में जानकारी ले रहे हैं.


बोटॉक्स एक ऐसा उपचार है, जो कुछ विशेष चेहरे की मांसपेशियों को अस्थायी रूप से रिलैक्स करके एक्सप्रेशन लाइन्स को कम करने में मदद करता है. हालांकि, यह उपचार हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है. इसका चुनाव व्यक्ति की त्वचा, चेहरे की बनावट, मेडिकल हिस्ट्री और अपेक्षाओं के आधार पर किया जाना चाहिए.

ऐसे किसी भी उपचार से पहले योग्य डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है. सही जानकारी, वास्तविक अपेक्षाएं और मरीज की सुरक्षा एस्थेटिक ट्रीटमेंट में सबसे महत्वपूर्ण हैं.