Ookla Study: नेटवर्क टेस्टिंग फर्म ओकला की नई स्टडी में बताया गया है कि केंद्र सरकार द्वारा देश में लोअर 6 GHz बैंड खोले जाने के लगभग आठ महीने बाद भी इसका इस्तेमाल 0.1% या उससे भी कम बना हुआ है। आसान भाषा में कहें तो सरकार ने इंटरनेट सेवाएं देने वाली कंपनियों को एक बड़ी छूट तो दे दी है, लेकिन इसके बावजूद लोगों के घरों में लगे वाईफाई राउटर नहीं बदल रहे हैं। इसके उलट, अमेरिका, यूरोप और दक्षिण कोरिया जैसे क्षेत्रों में 6 GHz बैंड का उपयोग घरों व दफ्तरों में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर हो रहा है। भारत के अलावा फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे देशों में भी इसका इस्तेमाल शुरू हुआ है, लेकिन यह बेहद सीमित है।
क्या है लोअर 6GHz बैंड?
5925 से 6425 MHz तक के स्पेक्ट्रम को 'लोअर 6 GHz बैंड' कहा जाता है। दुनिया के कई देशों में वाई-फाई के लिए इस बैंड को बिना लाइसेंस इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है।
अमेरिका, कनाडा, ब्राजील: इन्होंने पूरा 6 GHz बैंड (5925–7125 MHz, कुल 1200 MHz) डीलाइसेंस किया है।
भारत और यूरोप: इन्होंने लोअर 6 GHz बैंड (5925–6425 MHz, कुल 500 MHz) को वाई-फाई के लिए खोला है।
Wi-Fi 5 और Wi-Fi 6 सिर्फ पुराने 2.4 GHz और 5 GHz बैंड पर काम करते हैं। जबकि Wi-Fi 6E और Wi-Fi 7 नई तकनीकें हैं जो 6 GHz बैंड का उपयोग करती हैं। देश में अभी 2.4 GHz और 5 GHz बैंड का इस्तेमाल वाई-फाई के लिए सबसे ज्यादा होता है। इन बैंड्स पर नेटवर्क में भीड़भाड़ होने पर स्पीड घटती-बढ़ती है और लेटेंसी बढ़ जाती है।
भारत के सामने क्या समस्याएं
भारतीय यूजर्स आमतौर पर 40Mbps से 100Mbps का ब्रॉडबैंड प्लान घर में लगवाते हैं। Wi-Fi 5 राउटर उस स्पीड को अच्छे से संभाल लेता है, इसलिए एडवांस्ड गैजेट होने के बावजूद उस पर इंटरनेट स्पीड फिक्स ही रहती है। वैसे भी अगर कोई यूजर वाई-फाई 6E, वाई-फाई 7 राउटर लगा भी लेता है, तब भी उसकी स्पीड नहीं बढ़ेगी क्योंकि उसने प्लान तो 100Mbps तक का ही लिया है।
वाई-फाई 6E, वाई-फाई 7 राउटर को ना खरीदे जाने की वजह इनकी कीमत भी है। नॉर्मल Wi-Fi 5 राउटर 2 हजार रुपये तक में मिल जाता है, जबकि वाई-फाई 6E, वाई-फाई 7 राउटर के लिए 10 हजार से 25 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं।
भारत में अधिकतर वाईफाई यूजर, वही राउटर उपयोग करते हैं जो कंपनी उन्हें देती है। जैसे- जियो, एयरटेल, एक्साइटेल, हैथवे आदि के ग्राहक कंपनी से ही फ्री ऑफ कॉस्ट राउटर की डिमांड करते हैं। ऐसे में कंपनियां भी ज्यादातर WiFi 5 राउटर अपने ग्राहकों को देती हैं।
यह एक वजह है कि देश में लोअर 6GHz बैंड को डीलाइसेंस तो किया गया है, लेकिन उसका असर दिखाई नहीं दे रहा। ना तो घरों में इंटरनेट स्पीड बढ़ रही है ना ही राउटर एडवांस हो रहे हैं।
लोगों को नहीं हुआ फायदा: ओकला
ओकला की स्टडी में यह भी कहा गया है कि जिन भारतीय घरों ने Wi-Fi 5 से Wi-Fi 6 पर स्विच किया, उनकी मीडियन डाउनलोड स्पीड में कोई सुधार नहीं (-0.2%) देखा गया। भारत के 72.4% होम ब्रॉडबैंड कनेक्शन की स्पीड 100 Mbps से कम पाई गई। इसका सीधा मतलब है कि केवल राउटर एडवांस करने से स्पीड नहीं बढ़ेगी, ग्राहकों को अपने ब्रॉडबैंड प्लान भी अपग्रेड करने होंगे। मौजूदा समय में 100Mbps से अधिक स्पीड वाले प्लान बहुत महंगे हैं।