विधायक बेटे का सहज नारा या कोई सियासी संदेश?
हाल ही में दिग्विजय सिंह ने अपने सिर से साफा उतारकर अपने विधायक बेटे जयवर्धन सिंह के सिर पर रख दिया था। उनके इस वीडियो को लेकर सियासी गलियारों में खूब चर्चा हुई।

अब जयवर्धन का अपने पिता के लिए लगाया एक नारा सुर्खियों में है। इसमें कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह कहते सुनाई दे रहे हैं- ‘खाली कर दो रास्ते... राजा साहब के वास्ते।’

लोग सवाल उठा रहे हैं कि जयवर्धन का यह नारा महज अपने पिता के स्वागत का अंदाज था या इसके पीछे कोई सियासी संदेश भी छिपा है?

दरअसल, दिग्विजय सिंह इन दिनों सत्य, सनातन स्वाभिमान यात्रा लेकर अयोध्या की ओर जा रहे हैं। उनकी इस यात्रा में कई ऐसे दृश्य सामने आ रहे हैं, जिनके लोग अपने-अपने हिसाब से सियासी मायने निकाल रहे हैं।

यात्रा को लेकर यह चर्चा भी है कि राजा साहब का अगला पड़ाव आखिर कहां है? यानी इस यात्रा के बहाने उनका असल मिशन क्या है?

धनतेरस पर दुकानदार बने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय धनतेरस पर दुकानदार की भूमिका में नजर आए। वे अपनी पुश्तैनी दुकान पर बैठे और ग्राहकों को किराना सामान देते दिखे।

अब लोग उनके इस वीडियो पर चुटकी ले रहे हैं। कह रहे हैं कि चौंकिए मत... मंत्री जी ने राजनीति नहीं छोड़ी है। वे तो धनतेरस के मौके पर अपनी पुश्तैनी किराना दुकान पर पहुंचे थे।

वैसे, त्योहार भी जनता से जुड़ाव का एक जरिया होते हैं। ऐसे में नेता भला यह मौका कैसे छोड़ सकते हैं। कैलाश विजयवर्गीय ने भी अपनी पुश्तैनी दुकान पर पहुंचकर पुरानी यादें ताजा कीं और दुकानदार के अंदाज में लोगों से मेल-मुलाकात की।


सुर्खियों में द ग्रेट खली और विवेक तन्खा की मुलाकात
किरदार भले ही छोटे-बड़े नजर आ रहे हों, लेकिन दोनों का कद अपने-अपने क्षेत्र में काफी ऊंचा है। बात हो रही है WWE के मशहूर रेसलर द ग्रेट खली और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा की।

दरअसल, दीपावली की शुभकामनाओं के बहाने दोनों की मुलाकात हुई तो तस्वीरें चर्चा का विषय बन गईं। दोनों ने इस मुलाकात को सोशल मीडिया पर साझा किया और एक-दूसरे की जमकर तारीफ भी की।

खली ने जहां विवेक तन्खा को कानून की दुनिया के जानकारों में से एक बताया, वहीं तन्खा ने खली को अच्छा इंसान बताते हुए उनकी तारीफ की।

यानी मुलाकात दीपावली की शुभकामनाओं से शुरू हुई, लेकिन दोनों के कद और तारीफों ने इसे खास बना दिया।


दांव 'सरकार' का, बाजी मारी संगठन ने
बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष निशांत खरे को प्रदेश कार्यालय प्रभारी नियुक्त किया गया है। पार्टी के प्रदेश कार्यालय की देखरेख की जिम्मेदारी अब उन्हीं के पास होगी। खरे के नाम पर संगठन ने 23 सितंबर को ही पत्र जारी कर दिया था, लेकिन नियुक्ति की औपचारिक घोषणा में करीब डेढ़ महीने लग गए।

आखिर इस देरी की वजह क्या रही? पार्टी के भीतर चर्चा है कि सरकार चाहती थी कि प्रदेश कार्यालय प्रभारी की जिम्मेदारी उसकी पसंद के नेता को मिले। इसके लिए सरकार की ओर से कोशिशें भी की गईं।

17 और 18 सितंबर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन मध्यप्रदेश के दौरे पर थे। इस दौरान सरकार ने इंदौर के एक युवा नेता की उनके सामने जमकर तारीफ की थी। संगठन के अय्यारों ने इस तारीफ के पीछे की मंशा को समझने में बिल्कुल भी देर नहीं की।

इसके ठीक पांच दिन बाद, 23 सितंबर को संगठन ने निशांत खरे के नाम का सिफारिशी पत्र दिल्ली भेज दिया। अब जाकर केंद्रीय नेतृत्व ने इस पर मुहर लगा दी है।

इस तरह प्रदेश कार्यालय प्रभारी की नियुक्ति में सरकार की पसंद के बजाय संगठन का फैसला लागू हुआ। राजनीतिक हलकों में चर्चा चल रही है कि सरकार का दांव काम नहीं आया और बाजी संगठन ने मार ली।


कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा का एक वीडियो चर्चा में है। इसमें दिग्विजय सिंह अपने सिर पर बंधा साफा उतारकर बेटे जयवर्धन के सिर पर रख देते हैं। यात्रा के इस सीन ने सबका ध्यान खींच लिया। लोग इसके सियासी मायने भी निकाल रहे हैं।