भोपाल / मध्यप्रदेश विधानसभा के 12वें सत्र यानी शीतकालीन सत्र की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार सदन की कार्यवाही 7 दिसंबर से शुरू होकर 11 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान कुल 5 दिनों तक सदन में कामकाज होगा और इस अवधि में कोई अवकाश नहीं रखा गया है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल से औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद प्रशासनिक तैयारियों को तेज कर दिया गया है।

सत्र के दौरान राज्य से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों, विधेयकों और जनहित के विषयों पर चर्चा की संभावना है। विधानसभा सचिवालय ने सत्र के सफल संचालन के लिए सभी आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं। पांच दिवसीय इस सत्र में विपक्ष की ओर से सरकार को घेरने के लिए विभिन्न विषयों पर सवाल उठाए जा सकते हैं, जबकि सरकार की ओर से राज्य के विकास से जुड़े एजेंडे को प्राथमिकता के साथ पेश किया जाएगा।

विधानसभा के शीतकालीन सत्र पर नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार जी की प्रतिक्रिया

मध्यप्रदेश में समस्याओं का अंबार है, लेकिन भाजपा सरकार के पास विधानसभा में चर्चा के लिए समय नहीं है। शीतकालीन सत्र मात्र 5 दिनों का बुलाया गया है। इससे पहले मानसून सत्र भी 5 दिन का था, लेकिन उसे 3 दिन में ही खत्म कर दिया गया।

बालाघाट में बच्चों की मौत, सागर और देवास में जहरीली शराब से मौतें, किसानों की बदहाली, युवाओं की बेरोजगारी, महिलाओं की सुरक्षा, आदिवासी अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बढ़ता कर्ज और बिगड़ती कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर जनता को सरकार से जवाब चाहिए, लेकिन सरकार अपनी जवाबदेही से बचना चाहती है। प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों से चुने गए विधायक 7 करोड़ से अधिक जनता की आवाज़ हैं। जब जनता के इतने सवाल हों, तो विधानसभा में चर्चा के लिए समय बढ़ना चाहिए, घटाना नहीं!

सरकार सदन छोटा कर सकती है, लेकिन जनता के सवालों को नहीं!

कांग्रेस विधायक दल विधानसभा में जनता के हर मुद्दे को मजबूती से उठाएगा और भाजपा सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाएगा।