फिल्म रामायण सिनेमाघरों में आ चुकी है। करीब 4 हजार करोड़ में बनी फिल्म में राम का मुकुट, सीता के कुंडल से लेकर रावण के गहने काफी चर्चा में है। ये राजसी वैभव वाले गहने जयपुर में बने हैं।

करीब 18 महीने तक 25 ज्वेलरी डिजाइनरों ने उस दौर के मंदिरों और कला पर रिसर्च की। बार-बार डिजाइन बदले गए।

आखिरकार 150 से ज्यादा कारीगरों ने 4500 आभूषणों का खास कलेक्शन तैयार किया। इतना ही नहीं, राम-सीता के वनवास के लिए सोने-चांदी की जगह लकड़ी के गहने बनाए गए।

आखिर किस किरदार का मुकुट कितने में तैयार हुआ? किसके गहनों में किस क्षेत्र की संस्कृति झलकी और कैसे तैयार हुआ यह पूरा ज्वेलरी कलेक्शन? राजस्थान एक्सप्लेनर में आज जानिए 8 सवालों के जवाब....


सवाल-1 : इतने बड़े बजट की फिल्म से कैसे जुड़ा जयपुर का कनेक्शन?

जवाब : जयपुर की ज्वेलरी विरासत, खूबसूरती, शाही परंपरा और बेहतरीन कारीगरी से पूरी दुनिया वाकिफ है। यही वजह थी कि फिल्म रामायण बनाने वाली टीम करीब 3 साल पहले जयपुर पहुंची।

यहां के ज्वेलरी ब्रांड आम्रपाली के उत्तर से दक्षिण भारत शैली के शाही डिजाइन के कलेक्शन देखे। राम-सीता, रावण से लेकर तमाम किरदारों के लिए करीब 4500 आभूषणों की जरूरत थी।

काम पसंद आते ही ज्वेलरी ब्रांड को तुरंत ऑर्डर भी दे दिया गया। इस पूरे ऑर्डर को तैयार करने में करीब 18 महीने का वक्त लगा।

फिल्म रामायण का जयपुर कनेक्शन तब सबको पता चला जब फिल्म का ट्रेलर लॉन्च हुआ। इस इवेंट में ज्वेलरी तैयार करने वाले जयपुर के आभूषण निर्माताओं को भी विशेष रूप से बुलाया गया था।

सवाल-2 : एक फिल्म के लिए 4500 आभूषण, 18 महीने, कितने लोग लगे?

जवाब : ज्वेलरी के इस बड़े ऑर्डर को 25 डिजाइनरों ने तैयार किया। सबसे पहले रामायण के एक-एक किरदार को समझा गया- उनका व्यक्तित्व क्या है, उनकी राजसी स्थिति रामायण काल में कैसी थी।

फिर उस काल के इतिहास, मूर्ति कला, मंदिर कला और पारंपरिक आभूषणों पर रिसर्च की गई। तब जाकर डिजाइन फाइनल हुए़। इस काम को पूरा करने में 18 महीने का वक्त लगा।


सवाल- 3 : रामायण के किरदारों की ज्वेलरी के डिजाइन में आखिर ऐसा क्या अंतर है?

जवाब : भगवान राम अयोध्या से थे, माता सीता मिथिला और रावण लंका से थे। ऐसे में ज्वेलरी बनाते समय तीनों जगहों की संस्कृति का खास ध्यान रखा गया।

अयोध्या में राजसी और क्षत्रप भव्यता है, तो वहां के आभूषणों को वैसे ही ठाठ के साथ तैयार किया गया।

मिथिला में सौम्यता और पारंपरिक सुंदरता है, तो वहां के आभूषण महीन रखे गए।

रावण की लंका को सोने की नगरी बताया गया है, जहां अपार संपन्नता थी, तो वहां के आभूषणों में चमक और वैभव ज्यादा रखा गया।

भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जब तक महल में हैं तो उनके आभूषण भारी और राजसी हैं, लेकिन वनवास में उनका रूप बिल्कुल बदल जाता है।


सवाल-4 : वनवास में लकड़ी के आभूषण क्यों तैयार किए गए?

जवाब : वनवासी जीवन को असली दिखाने के लिए। जब राम, सीता और लक्ष्मण वन में जाते हैं तो सोना-चांदी नहीं पहन सकते। इसलिए उनके लिए बेहद कम और हल्की लकड़ी से ज्वेलरी बनाई गई। ताकि किरदार कहानी के अनुसार ओरिजिनल लगे।

सवाल-5 : किन-किन किरदारों के लिए आभूषण बने?

जवाब : हनुमान, बाली, सुग्रीव, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, राजा दशरथ, माता कौशल्या, कैकेयी, सुमित्रा, राजा जनक, माता सुनैना, उर्मिला, मांडवी, श्रुतिकीर्ति, रावण की पत्नी मंदोदरी और बहन शूर्पणखा तक। यहां तक कि भीड़ में दिखने वाले पात्रों के लिए भी अलग आभूषण बने। इसका मकसद सुंदरता नहीं, उस समय की कला को भी करीब से दिखाना था।


सवाल-6 : क्या ये आभूषण सोने-चांदी के हैं, उनकी कीमत कितनी होगी?

जवाब : फिल्म में दिखाए गए ज्यादातर आभूषण ब्रास और पीतल पर बने हैं। जहां जरूरत थी वहां सोने और चांदी की परत चढ़ाई गई, ताकि असली जैसे लगें। इतनी बड़ी संख्या में आभूषण शुद्ध सोने-चांदी से बनाना संभव नहीं था।

फिर भी बारीक नक्काशी, रवे का काम और पारंपरिक कारीगरी पर पूरा ध्यान दिया गया। इस ज्वेलरी कलेक्शन का पैसों में मूल्य तय करना आसान नहीं है।

फिल्म की शूटिंग के बाद पूरा संग्रह वापस आएगा, करीब 3 से 4 महीने में। फिर कुछ आभूषण संग्रहालय में प्रदर्शित किए जाएंगे।

हालांकि कुछ सेट अभी फिल्म यूनिट के पास ही हैं। क्योंकि रामायण दो पार्ट में बन रही है। अगले पार्ट की शूटिंग में कुछ काम बाकी है।

सवाल-7 : आम लोगों तक ये रामायण ज्वेलरी कैसे पहुंचेगी?

जवाब : फिल्म की ज्वेलरी से प्रेरित होकर आम लोगों के पहनने योग्य डिजाइन भी बनाए जा रहे हैं। इसमें ब्रोच, हेयरपिन, गले के लॉकेट और चांदी के सिक्के हैं।

माता सीता के कर्णफूल से प्रेरित छोटी ईयर रिंग, उनके विवाह की ज्वेलरी से प्रेरित हार और कुंदन-मीनाकारी कला वाले कड़े तैयार हो रहे हैं। वनवास वाली लकड़ी की ज्वेलरी से भी नए डिजाइन बनेंगे।

सवाल- 8 : पहले और किन-किन फिल्मों के लिए जयपुर में ज्वेलरी बन चुकी?

जवाब : ये पहली बार नहीं है जब जयपुर ने फिल्मों के लिए काम किया है। इससे पहले बाहुबली 1 और 2, मणिकर्णिका, रामलीला, सांवरिया जैसी फिल्मों के लिए भी यहां आभूषण बन चुके हैं।

लेकिन रामायण का प्रोजेक्ट सबसे खास है, क्योंकि जब फिल्म दुनिया भर में रिलीज हुई है, तो इसके साथ जयपुर की सदियों पुरानी कला भी बड़े पर्दे पर पहुंची है।