केजरीवाल बोले-जज RSS से जुड़े संगठन के कार्यक्रम में गईं

नई दिल्ली, अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को हाईकोर्ट जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से दिल्ली शराब घोटाला केस से हटने (रिक्यूज) की फिर मांग की। उन्होंने कोर्ट में डेढ़ घंटे दलीलें रखीं। उन्होंने कहा,
मुझे पहले से ही दोषी माना जा रहा है। जस्टिस शर्मा के आदेशों में एक पैटर्न दिखता है, जिसमें ED और CBI के हर तर्क को स्वीकार किया जाता है।

केजरीवाल ने कहा- जस्टिस शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में 4 बार शामिल हो चुकी हैं। इसके साथ ही दिल्ली के पूर्व सीएम ने जस्टिस शर्मा को हटाने की कुल 10 वजह बताईं।
इससे पहले 6 अप्रैल को सुनवाई हुई थी। तब कोर्ट ने CBI को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और कहा कि अगर कोई जज को मामले से हटाने की मांग वाली अर्जी देना चाहता है, तो दे सकता है।
केजरीवाल ने जज को हटाने की अर्जी क्यों लगाई, 5 पॉइंट्स में समझिए
- ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को आबकारी नीति मामले में केजरीवाल और 22 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। इस आदेश को CBI ने चुनौती दी, जिसकी सुनवाई वर्तमान में जस्टिस शर्मा कर रही हैं।
- 9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने नोटिस जारी किया और उस आदेश के उस हिस्से पर रोक लगा दी, जिसमें जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की बात कही गई थी।
- उन्होंने प्रारंभिक तौर पर यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियां गलत थीं और ट्रायल कोर्ट को PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग) की कार्यवाही स्थगित करने का निर्देश दिया।
- इसके बाद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, विजय नायर, अरुण पिल्लई और चनप्रीत सिंह रायट ने जस्टिस शर्मा को हटाने की अर्जी दाखिल की।





