मुकेश जी 20 साल से मुझे डरा रहे कि इंडस्ट्री बंद होगी, हमेशा नए टैलेंट को मौका देता हूं

बॉलिवुड को आशिकी 2, एक विलेन, हाफ गर्लफ्रेंड जैसी प्यार में पगी कहानियां देने वाले निर्देशक मोहित सूरी अब एक और प्रेम कहानी फिल्म सैयारा लेकर आ रहे हैं। इस फिल्म से अहान पांडे और अनीत पड्डा के रूप में दो नए चेहरे लॉन्च कर रहे मोहित सूरी से हमने उनके सिनेमा के विविध पहलुओं पर की खास बातचीत:

आपकी फिल्मों में गाने हमेशा से बहुत अहम रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ सालों में हिंदी फिल्मों में गानों काे कम महत्व दिया जाने लगा। आपको लगता है इससे फिल्मों को नुकसान हुआ है?
हर डायरेक्टर की अपनी एक सोच होती है। उनका अपना तरीका होता है कि उन्हें अपनी कहानी सुनाने के लिए क्या जरूरी लगता है। मुझे और कुछ आता नहीं है। मेरा मानना है कि कई बार एक गाने से आप जितना कह सकते हैं, वो चार-पांच सीन के जरिए भी नहीं कह पाते। मेरी पहली फिल्म जहर में एक गाना था, वो लम्हे वो बातें…, जो एक शादीशुदा जोड़े, जिसका रिश्ता आज टूट गया है, उसकी पूरी जिंदगी को साढ़े तीन-चार मिनट में बता देता है। ऐसे ही, तुम ही हो.., तेरी गलियां.. या सैयारा.., जैसे गानों से चंद मिनटों में आप पूरी पिक्चर का सुर समझ जाएंगे। मेरे लिए यह स्क्रीनप्ले टूल है। मेरे सिनेमा के लिए गाने जरूरी हैं। मैं दूसरों के लिए नहीं कह सकता, लेकिन मैं जो फिल्में देखकर बड़ा हुआ हुआ हूं, जैसे स्वर्गीय यश चोपड़ा जी या महेश भट्ट बैनर की फिल्में, जहां मेरी स्कूलिंग हुई, उनमें भी गाने बहुत अहम होते थे। इसलिए, मेरी हमेशा से ये सोच रही है कि मुझे जब फिल्में बनानी हैं तो मुझे गाने देने हैं। गानों से इमोशंस में जो वजन आता है, उसे रिप्लेस नहीं किया जा सकता।

आपने अपनी फिल्मों से कई नए चेहरे भी लॉन्च किए हैं। वो चाहें कलयुग में कुणाल खेमू और स्माइली हों, क्रुक में नेहा शर्मा या फिर अब सैयारा में अहान पांडे और अनीत पड्डा। क्या आपको लगता है कि इंडस्ट्री को नए ऐक्टर्स की जरूरत है?
असल में, मुझे ऐसा कभी नहीं लगता कि मुझमें वो टैलंट है कि मैं इंडस्ट्री को बदल सकता हूं या इंडस्ट्री की जरूरत क्या है, उसकी समझ मुझे नहीं है। मुझे सिर्फ ये पता होता है कि इस फिल्म के लिए मुझे क्या चाहिए? जैसे, सैयारा की बात करूं तो मुझे लगता है कि पहला प्यार 18-20 की उम्र में ही होता है, तो मुझे पहले प्यार की कहानी बनानी थी। जब ये लगता है कि आप इस प्यार के लिए सारी दुनिया छोड़ छाड़ देंगे, तो मुझे वो फिल्म बनानी थी, इसलिए मुझे नए चेहरे चाहिए थे। अब जैसे मैंने मैच्योर लव स्टोरी हमारी अधूरी कहानी बनाई तो वैसे ऐक्टर्स के साथ बनाई। हालांकि, मेरी कोशिश रहती है कि अपनी हर फिल्म से मैं एक आर्टिस्ट को लॉन्च करूं, वो चाहे म्यूजिशियन हो, गीतकार हो या ऐक्टर हो। एक नए म्यूजिक डायरेक्टर को तो मैं हर फिल्म में मौका देता हूं।

भट्ट कैंप को आपने अपना स्कूल कहा, वो आपकी फैमिली लिगेसी भी है, मगर हाल ही में इस बैनर में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला (महेश भट्ट-मुकेश भट्ट में अलगाव)। उस बारे में सोचकर मन में क्या भाव आते हैं?
उतार-चढ़ाव से हर फिल्ममेकर, हर इंसान गुजरता है। मैं किसी ऐसे इंसान से नहीं मिला, जिसने सिर्फ सफलता देखी हो। मुझे नहीं पता कि वहां अभी क्या हालात हैं। मैं उनके संपर्क में हूं, क्योंकि हम एक परिवार है, मगर हमारी फैमिली ऐसी है कि जब हम लोग मिलते हैं, चाहे वो इमरान (हाशमी) हो या वे (भट्ट) हो, हम कभी तू कौन सी फिल्में बना रहा, मैं क्या बना रहा हूं, इस पर बात नहीं करते। मैंने उनके साथ 8 फिल्में बनाई हैं। अभी भी मैंने उनको छोड़ा नहीं है, लेकिन आप खुद भी आत्मनिर्भर होना चाहते हैं और जब आप खुद की पहचान बनाना चाहते हैं तो कुछ चीजें छोड़नी पड़ती हैं। मुझे भट्ट साहब (महेश भट्ट) ने कहा था कि अभी तुम्हें मेरे नाम महेश भट्ट प्रेजेंट्स के नीचे काम करने की जरूरत नहीं है। तुम्हें अपना ब्रांड बनाना चाहिए। तब 30 साल के उम्र में मैंने पहली बार बाहर जाकर फिल्म की। मुझे पहले बोला गया कि इमरान हाशमी के बगैर फिल्म करो, तो आशिकी बनाई। महेश भट्ट के बगैर फिल्म बनाओ तो एक विलेन बनाई। फिर बोला गया कि मैच्योर लोगों के साथ बनाओ तो हमारी अधूरी कहानी बनाई। मुझे लगातार साबित करना पड़ा कि आप ये करके दिखाओ, मगर अब मैं उससे ऊपर उठ चुका हूं। अब मैं उसकी परवाह नहीं करता, लेकिन उतार चढ़ाव होता ही है। हालांकि, उनके साथ काम करने ना करने की ऐसी कुछ वजह नहीं है। अगर मेरे पास ऐसी कोई फिल्म है, जो उनके लायक है तो मैं खुशी-खुशी करूंगा।

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