जापान का यह बिजनेस टायकून कौन जो सब छोड़ बन गया शिव भक्‍त

नई दिल्‍ली: दौलत कमाने की रेस कभी खत्‍म नहीं होने वाली। यह बात कई साल पहले ही होशी ताकायुकी को समझ आ गई थी। आज वह इस दौड़ से बाहर निकल चुके हैं। कभी जापान की ब्‍यूटी इंडस्‍ट्री में होशी जाना-पहचाना नाम थे। 15 ब्यूटी स्टोर की चेन के वह मालिक हुआ करते थे। उन्‍होंने अब अपने जीवन का रास्‍ता पूरी तरह से बदल दिया है। अब होशी ताकायुकी ‘बाला कुंभा गुरुमुनि’ के नाम से जाने जाते हैं। अपने पिछले जन्म के हिमालयी ऋषि होने के सपनों और नाड़ी ज्योतिष के रहस्योद्घाटन से प्रेरित होकर आध्यात्म की ओर मुड़ गए हैं। उनका यह बदलाव सिर्फ व्यक्तिगत नहीं है। अलबत्‍ता, यह व्यावसायिक दृष्टिकोण भी प्रस्तुत करता है।

उत्तराखंड में आध्यात्मिक खोज की यात्रा पर निकले होशी ताकायुकी कभी टोक्यो में 15 ब्यूटी स्टोर्स की चेन चलाते थे। अब वह बाला कुंभा गुरुमुनि बन गए हैं। वह बड़े शिव भक्त हैं। हरिद्वार के कांवड़ यात्रा मार्ग पर केसरिया रंग के समुद्र में वह अलग ही दिखाई दिए। भगवान शिव के प्रति उनकी श्रद्धा और भक्ति ने कई लोगों को चौंकाया।

कैसे बदल गई जिंदगी?

लगभग 20 साल पहले तमिलनाडु में एक नाड़ी ज्योतिष केंद्र की यात्रा के बाद होशी ताकायुकी का परिवर्तन शुरू हुआ। वहां, ताड़ के पत्तों पर की गई भविष्यवाणियों में उनके पिछले जन्म का पता चला। उन्‍हें पता चला कि वह हिमालय के एक ऋषि थे। उन्हें हिंदू आध्यात्मिकता में लौटने का आह्वान किया गया था। उत्तराखंड के बार-बार आने वाले सपनों ने उनकी जिंदगी बदल दी।

कारोबार सौंपकर भारत आ गए

ताकायुकी ने टोक्यो में अपना व्यवसाय अपने फॉलोअर्स को सौंप दिया। उन्होंने अपने घर को शिव मंदिर में बदल दिया। एक दूसरी नाड़ी रीडिंग ने उनके आध्यात्मिक नाम – बाला कुंभा गुरुमुनि – की पुष्टि की। इससे उनका संकल्प और भी मजबूत हो गया।

शिव मंदिर के लिए खरीदी है 35 एकड़ जमीन

अब होशी 20 अनुयायियों के साथ भारत में हैं। वह देहरादून के एक शिविर में साथी कांवड़‍ियों को मुफ्त भोजन दे रहे हैं। उनके लंबे समय के एक दोस्त और जापान स्थित भारतीय सलाहकार रमेश सुंद्रियाल के अनुसार, उनकी दृष्टि यात्रा से कहीं आगे तक है। होशी उत्तराखंड में एक आश्रम तैयार करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने पुडुचेरी में एक भव्य शिव मंदिर के लिए 35 एकड़ जमीन भी खरीदी है।

बाला कुंभा गुरुमुनि के अनुसार, उनका मिशन अपनी आत्मा की जड़ों का पता लगाना और पूरे भारत में शिव मंदिरों का निर्माण करना है। होशी के साथ 20 जापानी अनुयायियों का भारत आना उनके ‘प्रभाव’ और ‘नेटवर्क’ को दर्शाता है।


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