मोनिका बेदी संग की फिल्म और कहलाए ‘फ्लॉप एक्टर’, डायरेक्‍टर बनकर चमकाई सुशांत सिंह राजपूत और फरहान की किस्‍मत

इंडस्ट्री में कई ऐसे दिग्गज रहे हैं जो बतौर एक्टर अपने करियर में कुछ न कर सके लेकिन जब कैमरे के पीछे पहुंचे तो कमाल कर दिया। जहां कई कलाकारों ने एक्टिंग सीखने के लिए प्रॉपर स्कूल जॉइन किया वहीं कइ महारथियों ने अपने अनुभवों से इसकी बारीकियां सीखी और उनसे बेहतर काम किया। इन्हीं में से एक हैं निर्देशक अभिषेक कपूर, निर्देशक जिनका सफर इस बात का सबूत है कि अगर आप जुनूनी हैं, मेहनती हैं और अपने काम के प्रति ईमानदार हैं, तो किसी भी मुश्किल को पार कर सफलता हासिल कर सकते हैं।

अभिषेक कपूर का जन्म 6 अगस्त 1971 को हुआ। एक बेहद साधारण परिवार में पले-बड़े हुए अभिषेक फिल्म बनाने का सपना देखा करते। वो बॉलीवुड के उन कम लोगों में से हैं जिन्होंने कोई फिल्म स्कूल की पढ़ाई नहीं की, फिर भी हिंदी सिनेमा में अपनी एक खास पहचान बनाई। उन्होंने खुद की मेहनत और अनुभवों से फिल्मों की दुनिया में नाम कमाया।

मोनिका बेदी के साथ फिल्म ‘आशिक मस्ताने’ से की शुरुआत

अभिषेक ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत साल 1995 में मोनिका बेदी के साथ फिल्म ‘आशिक मस्ताने’ से की। इसके बाद ‘उफ्फ! ये मोहब्बत’ में नजर आए। दोनों ही फिल्म कुछ खास कमाल नहीं कर पाई। इस असफलता से उन्हें ये बात समझ आ गई कि वो एक एक्टर के तौर पर अपने करियर को आगे नहीं बढ़ा सकते। इसके बाद उन्होंने अपनी किस्मत को निर्देशक और लेखक के तौर पर आजमाने की कोशिश की और 2006 में सोहेल खान और स्नेहा उल्लाल की लीड रोल वाली स्पोर्ट्स ड्रामा ‘आर्यन: अनब्रेकेबल’ से निर्देशन में कदम बढ़ाया। यह फिल्म लोगों को पसंद आई लेकिन उम्मीद के मुताबिक सफलता हासिल नहीं कर सकी।

अभिषेक कपूर ने निर्देशन में अपनी पकड़ दुनिया के सामने साबित की

साल 2008 में आई म्यूजिकल ड्रामा ‘रॉक ऑन’ से अभिषेक कपूर ने निर्देशन में अपनी पकड़ दुनिया के सामने साबित की। यह फिल्म भारतीय सिनेमा में म्यूजिकल ड्रामा की एक नई मिसाल बनी। फिल्म की कहानी, म्यूजिक और कलाकारों की एक्टिंग को काफी पसंद किया गया। इस फिल्म के लिए उन्हें हिंदी में बेस्ट फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।

फिल्म स्कूल की डिग्री ना होना करियर में कोई बड़ी बाधा नहीं

इसके साथ ही फिल्मफेयर पुरस्कार में ‘रॉक ऑन‘ को बेस्ट स्टोरी का पुरस्कार दिया गया। इसे बेस्ट फिल्म, निर्देशक और स्क्रिप्ट के लिए भी नॉमिनेट किया गया था। इस सफलता ने साबित कर दिया कि फिल्म स्कूल की डिग्री ना होना करियर में कोई बड़ी बाधा नहीं बनती, अगर आपकी मेहनत और कला मजबूत हो तो आप चमक सकते हैं।

फिल्म ‘काई पो चे’ का निर्देशन किया

इसके बाद साल 2013 में अभिषेक ने चेतन भगत की उपन्यास ‘द 3 मिस्टेक्स ऑफ माई लाइफ’ पर बनी फिल्म ‘काई पो चे!’ का निर्देशन किया। सुशांत सिंह राजपूत और राजकुमार राव की ‘काई पो चे’ को दुनिया के बड़े फिल्म महोत्सव बर्लिन में भी दिखाया गया और इसे आलोचकों ने खूब सराहा। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई की। फिल्म के लिए अभिषेक को फिल्मफेयर पुरस्कार में बेस्ट स्क्रिप्ट का अवॉर्ड मिला।

सुशांत और सारा की ‘केदारनाथ’ फिल्म का निर्देशन किया

2016 में उन्होंने चार्ल्स डिकेंस की मशहूर किताब ‘ग्रेट एक्सपेक्टेशंस’ पर ‘फितूर’ बनाई। इसमें तब्बू, कटरीना कैफ और आदित्य रॉय कपूर मुख्य किरदार में नजर आए थे। साल 2018 में उन्होंने ‘केदारनाथ’ फिल्म का निर्देशन किया, जो 2013 में उत्तराखंड में आई बाढ़ के दौरान बनी एक अंतर-जातीय प्रेम कहानी थी। इस फिल्म में सुंशात सिंह राजपूत और सारा अली खान लीड रोल में नजर आए थे। ‘केदारनाथ’ बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और क्रिटिक्स से भी जमकर तारीफ मिली।

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