सड़क दुर्घटना के शिकार हुए डॉक्टर, अब बीमा कंपनी देगी ढाई करोड़ का मुआवजा

नई दिल्लीसड़क दुर्घटना (Road Accident) में एक डॉक्टर की मौत हो गई। उस समय उनके परिवार में उनकी पत्नी, दो छोटे बच्चे और माता-पिता थे जो कि उन्हीं पर आश्रित थे। उनके गुजर जाने के बाद डॉक्टर को एक और बेटा हुआ। परिवार के कमाने वाले सदस्य के चले जाने के बाद सबके भरण-पोषण में दिक्कत होने लगी। अब मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (Motor accident claims tribunal) ने बीमा कंपनी को ढाई करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

क्या आया है फैसला

मोटर एक्सिडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल की पीठासीन अधिकारी शैली अरोड़ा ने साल 2023 के दौरान ओखला में हुई एक दुर्घटना के वाद में यह फैसला सुनाया है। इस दुर्घटना के शिकार डॉ. यासीन खान एक अस्पताल में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर थे। उस समय वह हर महीने 1.4 लाख रुपये कमाते थे। शैली अरोड़ा ने सोमवार को कहा, "मृत्यु के मामले में, दावेदारों के कानूनी उत्तराधिकारी को अप्रत्याशित लाभ की उम्मीद नहीं हो सकती है। साथ ही, दी गई मुआवजा राशि मुआवजे के लिए माफी नहीं हो सकती है।"

परिवार में कौन-कौन

जिस समय डॉ. यासीन खान दुर्घटना के शिकार हुए थे, उनकी उम्र 30 साल की थी। वह एक सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर थे और हर महीने 1.4 लाख रुपये कमाते थे। उस समय उनके परिवार में उनकी पत्नी, दो छोटे बेटे और माता-पिता थे। उनकी मृत्यु के चार महीने बाद ही एक और बेटे का जन्म हुआ। मतलब कि छह लोगों के भरण-पोषण पर संकट के बादल छा गए।

दुर्घटना का कारण लापरवाही

एक प्रत्यक्षदर्शी के बयान को ध्यान में रखते हुए, न्यायाधिकरण ने फैसला सुनाया कि बस ड्राइवर की लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण दुर्घटना हुई। न्यायाधिकरण ने कहा, "यह एक अच्छी तरह से स्थापित कानूनी सिद्धांत है कि… तथ्यों और परिस्थितियों पर व्यापक और व्यावहारिक तरीके से विचार किया जाना चाहिए। यह भी तय है कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्यवाही नियमित दीवानी मुकदमों से अलग है और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तकनीकी नियमों से सख्ती से शासित नहीं होती है।"

बीमा कंपनी का क्या रूख

दावेदार के वकील सुमित चौधरी ने कहा कि बस और उसके ड्राइवर की पहचान और शामिल होने के बारे में कोई विवाद नहीं था। उन्होंने बताया कि खान का परिवार उनकी आय पर ही निर्भर था। न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी ने दुर्घटना के कारण के बारे में कोई विवाद नहीं उठाया।


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