20 साल तक नहीं देना होगा कोई टैक्स… किस सेक्टर पर मेहरबानी की तैयारी में है सरकार?

नई दिल्ली: दुनिया में टेक्नोलॉजी का यूज बढ़ने के साथ ही डेटा सेंटर्स की डिमांड बढ़ने लगी है। डेटा सेंटर वह जगह होती है जहां क्रिटिकल ऐप्लिकेशंस और डेटा को रखा जाता है। सरकार देश में डेटा सेंटर्स डेवलपर्स को बढ़ावा देने के लिए बड़ी पहल करने जा रही है। बिजनस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक डेटा सेंटर्स डेवलपर्स को 20 साल तक टैक्स में छूट दी जा सकती है। नेशनल डेटा सेंटर पॉलिसी के नए ड्राफ्ट में यह प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि कैपेसिटी एडिशन, पावर इफेक्टिवनेस और रोजगार सृजन के लक्ष्यों को हासिल करने वाली कंपनियों को ही इसका फायदा मिलेगा।

ड्राफ्ट में कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय इस बारे में फाइनेंस मिनिस्ट्री से औपचारिक अनुरोध कर सकता है। डेटा सेंटर्स डेवलपर्स को डेटा सेंटर बनाने, हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग में काम आने साजोसामान पर इनपुट टैक्स क्रेडिट दिया जा सकता है। देश की डेटा सेंटर इंडस्ट्री साल 2019 से सालाना 24 फीसदी की तेजी से बढ़ी है। साल 2027 तक 795 मेगावाट नई कैपेसिटी विकसित होने की उम्मीद है। इससे देश में इंडस्ट्री की कुल कैपेसिटी 1,825 मेगावाट पहुंच जाएगी। ड्राफ्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय कंपनियों के कम से कम 100 मेगावाट डेटा सेंटर कैपेसिटी को चला रहे हैं, उन्हें परमानेंट एस्टाब्लिशमेंट स्टेटस दिया जाना चाहिए।

कहां बनेंगे डेटा सेंटर

ड्रॉफ्ट पॉलिसी के मुताबिक एलिजिबल कंपनियों को उसी शहर या किसी अन्य लोकेशन पर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस डेवलपमेंट या मॉडलिंग सेंटर स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। एक अधिकारी ने कहा कि इससे नए रोजगार पैदा होंगे और साथ ही एआई, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबरसिक्योरिटी जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी में घरेलू क्षमता भी बढ़ेगी। राज्यों को इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, आईटी हब और मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर्स के करीब डेटा सेंटर के लिए जमीन मुहैया कराने को कहा जाएगा।

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