भोपाल के मानस भवन इलाके से बस्ती हटाए जाने का भारी विरोध, कांग्रेस बोली- आदिवासियों को शहर से दूर भेजने की तैयारी

भोपाल। शहर के पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित मानस भवन के पास बसी करीब 70 साल पुरानी बस्ती को हटाने की कार्रवाई गुरुवार को तेज हो गई। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में बैरिकेडिंग कर आवाजाही बंद कर दी है। भारी पुलिस बल तैनात है। इस दौरान 27 परिवारों को हटाकर उन्हें शिफ्ट किए जाने की तैयारी है। कार्रवाई के विरोध में स्थानीय लोग और कांग्रेस नेता धरने पर बैठ गए, जिससे माहौल तनावपूर्ण बना रहा।

मानस भवन झुग्गी बस्ती हटाने की कार्रवाई के बीच रहवासियों ने हंगामा कर रहे हैं। पुलिस ने उनको हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग सभी को गिरफ्तार किया।कांग्रेस नेता और विधासभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार पर हमला करते हुए कहा कि आदिवासियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जा रहा है। उनके शहर से हटाकर भौंरी, कलखेड़ा और मालीखेड़ी जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में शिफ्ट कर रहे हैं।

कांग्रेस नेता और विधासभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार पर हमला करते हुए कहा कि आदिवासियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जा रहा है। उनके शहर से हटाकर भौंरी, कलखेड़ा और मालीखेड़ी जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में शिफ्ट कर रहे हैं।

बस्ती हटाने को लेकर विरोध

बस्ती हटाने की कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस के कई नेता मौके पर पहुंचे। विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान एक युवक टावर पर चढ़ गया, जिसे पुलिस ने समझाइश देकर नीचे उतारा। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और अन्य नेताओं ने इसे गरीबों के साथ अन्याय बताते हुए पुनर्वास की उचित व्यवस्था की मांग की।

रहवासियों की परेशानी

कार्रवाई के दौरान कई परिवारों ने अपने घरों में ताला लगाकर सामान की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस को सौंप दी। लोगों ने कहा कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया, जिससे जरूरी सामान और दस्तावेज घरों में ही रह गए। एक छात्रा ने रोते हुए कहा कि उसके परीक्षा के दस्तावेज घर में दब गए हैं। अब वह नीट की परीक्षा कैसे देगी, जो कि कल है। यह समझ नहीं आ रहा।

भविष्य की चिंता

स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने वर्षों की मेहनत से अपना घर और सामान तैयार किया था। अचानक हटाने की कार्रवाई से उनका रोजगार, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जीवन प्रभावित होगा। कई परिवारों ने आशंका जताई कि दूरस्थ क्षेत्रों में शिफ्ट होने से उनके लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो जाएगा।

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