ईरान के खिलाफ युद्ध था प्रिंस MBS का मकसद, सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौते के गोपनीय दस्तावेज लीक

इस्लामाबाद: सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच पिछले साल सितंबर में हुए सीक्रेट रक्षा समझौते के कुछ दस्तावेज लीक कर दिए गये हैं। जिस वक्त अमेरिका और ईरानी अधिकारियों के बीच इस्लामाबाद में शांति समझौते पर बैठक चल रही थी उस वक्त सऊदी अरब ने अचानक ये खुलासा कर दिया कि पाकिस्तान वायुसेना के लड़ाकू विमान और दूसरी सैन्य संपत्तियां रियाद पहुंची हैं। सऊदी ने ये भी बताया कि ‘ये सैन्य तैनाती रियाद और इस्लामाबाद के बीच पिछले साल हुए एक रक्षा समझौते का नतीजा है।’ इस समझौते को अब मौजूदा क्षेत्रीय युद्ध और सऊदी अरब में सैन्य व ऊर्जा ठिकानों पर ईरान के कई हमलों के बीच सक्रिय कर दिया गया है।सवाल ये है कि आखिर सऊदी अरब ने ठीक उसी वक्त पाकिस्तानी विमानों के रियाद पहुंचने की रिपोर्ट क्यों सार्वजनिक कर दी जब इस्लामाबाद में इतनी बड़ी बैठक हो रही थी? क्या इसका मकसद ईरानी प्रतिनिधिमंडल के मन में पाकिस्तान की मंशा को लेकर शंका पैदा करना था? ये शांति वार्ता तो नाकाम हो गई है लेकिन पिछले साल सितंबर में हुए पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौते की कुछ बातें भी लीक कर दी गई हैं। इस लीक डॉक्यूमेंट से पता चलता है कि पाकिस्तान अब खुद उस युद्ध में एक पक्ष बन सकता है जिसे खत्म करवाने के लिए वो मध्यस्थता कर रहा है।

सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौते के सीक्रेट्स लीक

  • पाकिस्तान और सऊदी अरब ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इस रक्षा समझौते की शर्तों को सार्वजनिक नहीं किया है। पाकिस्तानी संसद में भी इसपर बात नहीं हुई है इसीलिए सबकुछ सीक्रेट है। ‘ड्रॉप साइट’ नाम के वेबसाइट पर इसे लीक किया गया है।
  • समझौते की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें ‘कलेक्टिव डिफेंस’ का प्रावधान है। यानी किसी भी एक देश पर हमला होने पर उसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। यह नाटो (NATO) के आर्टिकल 5 जैसा ही है।
  • सऊदी अरब ने पाकिस्तान के परमाणु हथियारों तक पहुंच या उनके संरक्षण की गारंटी मांगी है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे स्पष्ट नहीं किया गया लेकिन "सभी सैन्य संसाधनों" के इस्तेमाल की बात इसमें शामिल है। दस्तावेजों से पता चलता है कि पाकिस्तानी सेना सऊदी अरब के साथ किसी भी सौदे में सिर्फ पारंपरिक बलों को शामिल करने में ही दिलचस्पी रखती थी और उसने इस दायित्व से परमाणु क्षमता को स्पष्ट रूप से बाहर रखने की मांग की थी। लेकिन क्या पाकिस्तान सऊदी को परमाणु मदद देगा ये साफ नहीं किया गया है।
  • इस समझौते की शुरुआत 14 दिसंबर 1982 को दोनों देशों के बीच हुए एक गोपनीय करार से हुई थी। इसका एक संशोधित रूप जिसे ‘सैन्य सहयोग समझौता’ (MCA) नाम दिया गया, उसपर 30 जुलाई 2005 को हस्ताक्षर किए गये। 2005 का समझौता ही 2025 में किए गये समझौते का आधार है और करीब करीब वही बातें हैं।
  • 2005 के इस गोपनीय समझौते में कहा गया है कि MCA का मकसद "दोनों देशों के बीच सैन्य क्षेत्र में सहयोग को विकसित और सुदृढ़ करना है। यह विस्तार प्रशिक्षण, सेना की तैनाती, रक्षा उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, अनुभवों के आदान-प्रदान, हथियारों, उपकरणों, कलपुर्जों और सैन्य चिकित्सा सेवाओं की खरीद जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा।"
  • 2025 के समझौते में सबसे बड़ा अंतर ये है कि अब एक देश पर हमला दूसरे देश पर हमला माना जाएगा। यानि अब पाकिस्तान को सऊदी अरब की प्रत्यक्ष तौर पर रक्षा करनी होगी।
  • लीक दस्तावेज से पता चलता है कि सऊदी अरब के साथ इस तरह का समझौता करने को लेकर पाकिस्तान सेना के अंदर जोरदार बहस हुई थी। कुछ अधिकारियों ने असीम मुनीर को चेतावनी दी कि ये सौदा सऊदी के पक्ष में है और पाकिस्तान, सऊदी की रक्षा करने के लिए बाध्य है।
  • यह समझौता विशेष रूप से ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच हुआ है। इसमें प्रावधान है कि यदि ईरान सऊदी की तेल सुविधाओं या बुनियादी ढांचे पर हमला करता है तो पाकिस्तान सैन्य रूप से हस्तक्षेप करने के लिए बाध्य होगा।
  • वर्तमान में भी हजारों पाकिस्तानी सैनिक सऊदी में हैं लेकिन नए सौदे के तहत इनकी संख्या और उनकी भूमिका (कॉम्बैट रोल) में बड़ा विस्तार किया जाएगा।

लीक दस्तावेज से पता चलता है कि हालांकि ये समझौता कतर पर किए गये इजरायली हमले के डर से किया गया था लेकिन सऊदी अरब वास्तव में ईरान के हमले की आशंका की वजह से ही समझौता किया था। ठीक वैसे ही जैसे 1980 के दशक से पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच सभी सहयोग ईरान को ही ध्यान में रखकर किए गए थे। SMDA उन लीक हुए दस्तावेजों का हिस्सा नहीं है। लेकिन पाकिस्तान की ओर से सार्वजनिक रूप से दी गई जानकारियों से पता चलता है कि यह नया समझौता पुराने MCA का ही एक अपडेट था जिसमें समझौते का नाम बदलने के साथ-साथ सुरक्षा संबंधों में कुछ अतिरिक्त संशोधन भी शामिल किए गए थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button